F-22 से ‘डार्क ईगल’ तक शक्ति प्रदर्शन, फिर भी ईरान बेअसर क्यों?

Mediterranean क्षेत्र में उड़ता F-22 रैप्टर जेट और डार्क ईगल मिसाइल सिस्टम की तस्वीर।
F-22 जेट और डार्क ईगल मिसाइल के जरिए अमेरिका का शक्ति प्रदर्शन।

अमेरिका का सैन्य दबाव तेज, लेकिन तेहरान का रुख अब भी सख्त

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता दिख रहा है। इस हफ्ते भूमध्य सागर में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों ने नई बहस छेड़ दी। ग्रीस के चानिया एयरपोर्ट, जो सूडा बे नौसैनिक अड्डे से जुड़ा है, वहां F-22 Raptor स्टील्थ फाइटर जेट की मौजूदगी ने हलचल बढ़ा दी। हालांकि पेंटागन ने इसे ‘रूटीन तैनाती’ बताया। लेकिन सैन्य विश्लेषक इसे ईरान पर संभावित दबाव रणनीति मान रहे हैं।

‘डार्क ईगल’ की रहस्यमयी तस्वीरें

तनाव तब और बढ़ा जब अमेरिकी सेना ने अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल Dark Eagle की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। कुछ ही घंटों में ये तस्वीरें हटा ली गईं। यह मिसाइल मैक 5 से अधिक रफ्तार से उड़ सकती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद कठिन है। तस्वीरें हटाए जाने से अटकलें तेज हो गईं कि क्या इसे किसी फ्रंटलाइन पर तैनात कर दिया गया है।

ईरान के भीतर बढ़ती हलचल

बाहरी दबाव के बीच ईरान के अंदर भी असंतोष नजर आया। Sharif University of Technology सहित कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने प्रदर्शन किया। तेहरान और मशहद में भी विरोध दर्ज हुआ। कुछ जगहों पर सरकार समर्थक समूहों से झड़प की खबर है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि हालिया अशांति में हजारों लोगों की जान गई है।

ट्रंप की डेडलाइन और नौसैनिक ताकत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को ‘फेयर डील’ स्वीकार करने के लिए पहले 10 दिन की समयसीमा दी। बाद में इसे 15 दिन तक बढ़ाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौता नहीं हुआ तो ‘खराब परिणाम’ हो सकते हैं। इस बीच USS Gerald R. Ford भूमध्य सागर में प्रवेश कर चुका है। वहीं USS Abraham Lincoln पहले से खाड़ी क्षेत्र में तैनात है।

ईरान का साफ संदेश

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने स्पष्ट कहा कि उनका देश दबाव में नहीं झुकेगा। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संकेत दिया कि जिनेवा वार्ता के बाद समझौते का मसौदा जल्द तैयार हो सकता है। हालांकि उन्होंने परमाणु कार्यक्रम खत्म करने के अमेरिकी दावे को खारिज किया।

आखिर ईरान क्यों नहीं डर रहा?

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का सामना करता आया है। इसलिए मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति अब कम असरदार दिख रही है। इसके अलावा, क्षेत्रीय गठजोड़ और आंतरिक राजनीतिक संदेश भी तेहरान को सख्त रुख बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। स्पष्ट है कि शक्ति प्रदर्शन जारी है। लेकिन कूटनीतिक समाधान ही असली परीक्षा होगा।

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