USS Gerald R Ford में हाईटेक सिस्टम फेल, अमेरिकी नौसेना की किरकिरी
अमेरिका का सबसे ताकतवर और महंगा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R Ford अपनी जबरदस्त तकनीक और युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है। इस युद्धपोत का नाम सुनते ही न्यूक्लियर पावर, स्टील्थ टेक्नोलॉजी और अजेय सैन्य ताकत की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, अब इसी हाईटेक एयरक्राफ्ट कैरियर से जुड़ी एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, जिसने अमेरिकी नौसेना की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
हाईटेक जहाज, लेकिन टॉयलेट बना बड़ी समस्या
करीब ₹1.19 लाख करोड़ की लागत से बने USS Gerald R Ford में हजारों जवानों की तैनाती की क्षमता है। इसके बावजूद जहाज में टॉयलेट सिस्टम लगातार फेल हो रहा है। अमेरिकी नौसेना के एक आंतरिक दस्तावेज के अनुसार, जून 2023 से जब भी जहाज पर पूरा क्रू मौजूद रहा है, तब लगभग हर दिन वैक्यूम कलेक्शन और होल्डिंग टैंक सिस्टम में खराबी दर्ज की गई है।
FOIA दस्तावेज से हुआ खुलासा
यह जानकारी फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन एक्ट यानी FOIA के तहत जारी एक बिना तारीख वाले दस्तावेज से सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि टॉयलेट सिस्टम के जाम और मरम्मत के लिए जहाज के तकनीकी कर्मचारियों को बार-बार बुलाना पड़ा। इससे न सिर्फ क्रू को परेशानी हुई, बल्कि रोजमर्रा के ऑपरेशन पर भी असर पड़ा है।
बार-बार लेनी पड़ी बाहरी मदद
नौसेना के रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 2023 से अब तक USS Gerald R Ford को तकनीकी समस्याओं के कारण 42 बार बाहरी सहायता लेनी पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 32 बार सिर्फ साल 2025 में ही मदद बुलानी पड़ी। जून में हालिया तैनाती के बाद से अब तक 12 बार तकनीकी टीमों को जहाज पर बुलाया गया है।
जहाज की ताकत, लेकिन मूलभूत जरूरत फेल
USS Gerald R Ford में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीक है। यह सिस्टम भाप की जगह मैग्नेटिक वेव्स से विमानों को लॉन्च करता है। इसके अलावा ऑटोमेटेड सिस्टम, न्यूक्लियर पावर और लेजर डिफेंस जैसी खूबियां इसे दुनिया का सबसे एडवांस कैरियर बनाती हैं।
बड़ा सवाल क्यों खड़ा हुआ
इतनी उन्नत तकनीक के बावजूद फ्लश टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधा का बार-बार फेल होना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार शिकायतें इस बात का संकेत हैं कि सिस्टम को स्थायी समाधान की जरूरत है।
