सरकार का बड़ा फैसला: सड़क हादसे घटाने के लिए हर नई गाड़ी में लगेगी व्हीकल-टू-व्हीकल टेक्नोलॉजी, 5–7 हजार रुपये तक बढ़ सकती है कीमत
अब सड़क पर चलने वाली गाड़ियां सिर्फ ड्राइवर पर निर्भर नहीं रहेंगी, बल्कि खुद एक-दूसरे से “बात” कर पाएंगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार 2026 के अंत तक व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद सड़क हादसों को कम करना और ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
V2V तकनीक के तहत हर वाहन में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगाई जाएगी, जो वायरलेस सिग्नल के जरिए आसपास चल रही गाड़ियों को अपनी स्पीड, लोकेशन, ब्रेक और दिशा जैसी अहम जानकारी भेजेगी। इससे गाड़ी पास आने से पहले ही ड्राइवर को संभावित खतरे का अलर्ट मिल जाएगा। गडकरी ने इसकी तुलना हवाई जहाजों के पायलटों के बीच होने वाले कम्युनिकेशन से की है।
यह तकनीक खास तौर पर कोहरे, अंधे मोड़ों, ब्लाइंड स्पॉट और अचानक ब्रेक जैसी परिस्थितियों में बेहद कारगर साबित होगी। अगर आगे कोई गाड़ी खराब होकर खड़ी है या अचानक ब्रेक लगाती है, तो पीछे आने वाले वाहन को पहले ही चेतावनी मिल जाएगी।
सरकार इस प्रोजेक्ट पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च कर सकती है। हालांकि, OBU लगाने से गाड़ियों की कीमत 5,000 से 7,000 रुपये तक बढ़ने का अनुमान है। शुरुआत में इसे नई कारों, बसों और ट्रकों के लिए अनिवार्य किया जाएगा।
V2V के लिए जरूरी स्पेक्ट्रम को लेकर दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ सहमति बन चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को 50% तक कम किया जाए, और V2V तकनीक इस दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
