संसद में संयुक्त संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने रेलवे के आधुनिकीकरण और रिकॉर्ड तोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर पर जताया गर्व
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय रेल की उपलब्धियों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने हाल ही में असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की विशेष रूप से सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि यह ट्रेन भारतीय रेल के आधुनिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जो लंबी दूरी की यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और तेज बनाएगी।
गरीब और मध्यम वर्ग की रीढ़ है भारतीय रेल
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय रेल हमेशा से गरीब और मध्यम वर्ग की सेवा करती आई है। अब यह सेवा आधुनिक सुविधाओं और विश्वस्तरीय तकनीक के साथ और मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिससे ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
दिल्ली से आइजोल तक सीधा रेल संपर्क
राष्ट्रपति ने दिल्ली और मिजोरम की राजधानी आइजोल के बीच शुरू हुए सीधे रेल संपर्क का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजधानी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर जब आइजोल तक पहुंचाया गया, तब वहां के लोगों में जो खुशी और उत्साह देखने को मिला, उसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। यह पूर्वोत्तर भारत को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
विश्व रिकॉर्ड बना रहा भारत का रेल इंफ्रास्ट्रक्चर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कई विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इनमें दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज चिनाब ब्रिज और तमिलनाडु का ऐतिहासिक पंबन ब्रिज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी कौशल का प्रमाण हैं।
देशभर में फैला वंदे भारत नेटवर्क
राष्ट्रपति ने बताया कि आज देश में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनें न केवल समय की बचत कर रही हैं, बल्कि यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव भी दे रही हैं। इससे पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिल रही है।
