वंदेभारत–तेजस में बदबूदार खाना? 6645 शिकायतों से खुला सिस्टम का सच

Passengers complaining about poor quality food in Vande Bharat and Tejas trains
Passengers raise concerns over food quality in premium trains

एडवांस पेमेंट के बावजूद घटिया लंच-डिनर, मारपीट और ओवरचार्जिंग तक के आरोप

प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों ने खाने की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पहले जनवरी में शिकायतें सामने आईं। फिर मई में मारपीट का मामला भी जुड़ गया। हालांकि यात्रियों से एडवांस पेमेंट लिया जाता है। इसके बावजूद सर्विस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अलग-अलग तारीखों पर सामने आए मामले

1 जनवरी को भुवनेश्वर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस में एक यात्री ने वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि परोसा गया खाना इंसानों के खाने लायक नहीं था। साथ ही फूड पॉइजनिंग का खतरा बताया।

23 जनवरी को कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में अधपके चावल और कड़क रोटियां परोसी गईं। मात्रा भी बेहद कम बताई गई।

25 जनवरी को इसी रूट पर दुर्गंध वाली दाल की शिकायत आई। हंगामे के बाद कैटरिंग स्टाफ ने खाना खुद फेंक दिया।

7 मई को 15 रुपए की पानी की बोतल 20 रुपए में बेची गई। जब यात्री ने ऑनलाइन शिकायत की, तो पैंट्री स्टाफ पर मारपीट का आरोप लगा।

6645 शिकायतों ने बढ़ाई चिंता

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि 2024-25 में Indian Railway Catering and Tourism Corporation को 6645 शिकायतें मिलीं। इनमें बासी खाना, घटिया गुणवत्ता, ओवरचार्जिंग और मेन्यू से आइटम गायब होने जैसे मामले शामिल हैं। हालांकि 1341 मामलों में जुर्माना लगाया गया। कई मामलों में चेतावनी और एडवाइजरी भी दी गई।

सिस्टम में गड़बड़ी कहां?

कैटरिंग का जिम्मा IRCTC निजी कंपनियों को देता है। ठेके 5 साल के लिए होते हैं। परफॉर्मेंस के आधार पर एक्सटेंशन भी मिलता है। जांच में सामने आया कि क्लस्टर ए की 265 ट्रेनों में से 218 के ठेके आरके ग्रुप के पास हैं। इसके खिलाफ 1910 शिकायतें दर्ज हुईं।

2017 की CAG रिपोर्ट में भी कहा गया था कि सिलिंग लिमिट न होने से मोनोपॉली बढ़ी। कंपनियां रिजर्व प्राइस से 70% तक ज्यादा बोली लगाकर ठेका लेती हैं। फिर लागत निकालने के लिए क्वालिटी से समझौता करती हैं।

रेलवे बोर्ड की भूमिका भी सवालों में

नीति बनाना और निगरानी करना रेलवे बोर्ड की जिम्मेदारी है। लेकिन 2017 की पॉलिसी में सिलिंग लिमिट हटा दी गई। इसके बाद बड़े ग्रुप्स ने अलग-अलग नाम से कंपनियां बनाकर ज्यादा ठेके हासिल किए। हालांकि नियमों के बावजूद एक ही रूट पर कई प्रीमियम ट्रेनें एक कंपनी को दी गईं। इसके चलते प्रतिस्पर्धा खत्म होती दिख रही है।

जवाब का इंतजार

दैनिक भास्कर ने IRCTC से सवाल पूछे हैं। फिलहाल जवाब नहीं मिला है। आरके ग्रुप के सीईओ कैलाश अग्रवाल से भी संपर्क किया गया। उन्होंने बाद में बात करने की बात कही। अब बड़ा सवाल यही है कि जब यात्री पहले से पूरा भुगतान करते हैं, तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन क्यों नहीं मिल पा रहा।

Read More :- सहजपुर में गूंजा भक्ति रस: विशाल कन्हैया दंगल का भव्य आयोजन