मौसम के अचानक बदले मिजाज का शरीर पर क्या असर, डॉक्टर से जानिए बचाव के जरूरी उपाय
मौसम बदला, ठंड ने फिर बढ़ाई चिंता
वसंत पंचमी के दिन अचानक मौसम ने करवट ली है। पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। वहीं दिल्ली-NCR और यूपी में बारिश और तेज हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है। तापमान में गिरावट के चलते एक बार फिर शीतलहर चलने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि सर्दी के मौसम में बारिश और ठंडी हवाओं का सेहत पर क्या असर पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बदलाव हल्के में लेने लायक नहीं है।
ठंड में शरीर कैसे करता है रिएक्ट?
दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुलिन कुमार गुप्ता बताते हैं कि ज्यादा ठंड पड़ने पर शरीर अपनी गर्मी को बचाने की कोशिश करता है। इसके लिए हाथ-पैरों की नसें सिकुड़ जाती हैं। इसे पेरिफेरल वेसल कंस्ट्रिक्शन कहा जाता है। इससे शरीर का हीट लॉस कम होता है, लेकिन उंगलियों में ब्लड फ्लो घट जाता है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर उंगलियां नीली पड़ सकती हैं और गंभीर मामलों में गैंगरीन का खतरा भी होता है।
फ्रॉस्ट बाइट और चोट का जोखिम
डॉ. गुप्ता के मुताबिक बर्फबारी वाले इलाकों में ठंड इतनी ज्यादा हो जाती है कि उंगलियों की कोशिकाओं का पानी जमने लगता है। इसे फ्रॉस्ट बाइट कहा जाता है। इससे स्थायी नुकसान हो सकता है। कई बार उंगलियां गल जाती हैं और सर्जरी तक की जरूरत पड़ जाती है। वहीं बर्फ पर फिसलने से फ्रैक्चर और गंभीर चोटों का खतरा भी बढ़ जाता है।
दिल्ली-NCR की ठंड और हार्ट पेशेंट
अगर ठंड दिल्ली-NCR जैसी हो तो शरीर ब्लड फ्लो बनाए रखने के लिए हार्ट रेट बढ़ा देता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हार्ट के मरीजों में इस कारण हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हो जाता है। ठंड में लोग पानी कम पीते हैं। इससे खून गाढ़ा हो जाता है और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है।
अस्थमा और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
ठंड और ड्राई मौसम से अस्थमा के मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है। ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक धूप न निकलने से तनाव और एंग्जायटी भी बढ़ सकती है। कई लोग ठंड से बचने के लिए हीटर या अंगीठी जलाते हैं, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे करें बचाव?
डॉ. गुप्ता सलाह देते हैं कि ठंड में खुद को गर्म रखना सबसे जरूरी है। एक मोटा कपड़ा पहनने के बजाय कई हल्के कपड़े पहनें। गीले कपड़े तुरंत बदलें। हाथ-पैर, कान और सिर ढककर रखें। बुजुर्ग, बच्चे और हार्ट पेशेंट खास सावधानी बरतें। पर्याप्त पानी पिएं और बंद कमरे में अंगीठी या हीटर का इस्तेमाल न करें।
