1945 के बाद पहली बार इतना लंबा न्यूक्लियर साइलेंस, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं इसे नाजुक उपलब्धि
दुनिया इस समय एक असाधारण दौर से गुजर रही है। पिछले 8 साल, 4 महीने और 11 दिनों से किसी भी देश ने परमाणु परीक्षण नहीं किया, जो 1945 के बाद का सबसे लंबा अंतराल है। इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञ इसे बेहद नाजुक शांति करार दे रहे हैं।
आखिरी बार उत्तर कोरिया ने 3 सितंबर 2017 को परमाणु परीक्षण किया था। इसके बाद से वैश्विक स्तर पर न्यूक्लियर टेस्ट पर एक तरह का मौन छाया हुआ है। अब तक दुनिया में 2050 से अधिक परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें अमेरिका ने सबसे ज्यादा 1030, सोवियत संघ/रूस ने 700 से अधिक, चीन ने 45 और भारत ने 6 परीक्षण किए हैं।
वर्तमान में दुनिया के पास 12,000 से ज्यादा परमाणु हथियार मौजूद हैं, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत सिर्फ अमेरिका और रूस के पास हैं। यही वजह है कि इन दोनों देशों की नीतियां वैश्विक स्थिरता को सीधे प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने के संकेत दिए हैं। साथ ही, परमाणु हथियारों की सीमा तय करने वाली START संधि 5 फरवरी के बाद समाप्त हो सकती है, जिससे हालात बदलने की आशंका जताई जा रही है।
इतिहास गवाह है कि 1962 में अकेले 178 परमाणु परीक्षण हुए थे, जो आज भी डरावना रिकॉर्ड है। ऐसे में मौजूदा न्यूक्लियर साइलेंस भले ही राहत देता हो, लेकिन यह कितने समय तक कायम रहेगा, इस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।
