केमिकल युक्त पानी ने बढ़ाई चिंता, श्रद्धालु ले रहे सेल्फी
मथुरा। गोकुल बैराज के पास यमुना नदी इन दिनों सफेद झाग की मोटी परत से ढकी नजर आ रही है। यह दृश्य दूर से बेहद आकर्षक दिखता है। इसलिए कई श्रद्धालु यहां रुककर तस्वीरें ले रहे हैं। कुछ लोग इसे प्राकृतिक दृश्य समझ रहे हैं। लेकिन हकीकत इससे अलग है। दरअसल, यह झाग केमिकल युक्त पानी और गंदे नालों के कारण बन रहा है। शहरों और फैक्ट्रियों का अपशिष्ट बिना पूरी तरह शोधन के नदी में गिर रहा है। नतीजा साफ है। पानी में रसायन बढ़ रहे हैं। ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है। और झाग की चादर फैलती जा रही है।
मोक्षदायिनी खुद सांस लेने को मजबूर
धार्मिक मान्यता में यमुना को भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी और मोक्षदायिनी कहा जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां स्नान और आचमन के लिए आते हैं। हालांकि अब हालात बदल रहे हैं। पानी से बदबू आने लगी है। जलीय जीव मर रहे हैं। श्रद्धालु भी असहज महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषण धीरे-धीरे बढ़ा है। पहले पानी साफ दिखता था। अब झाग के पहाड़ बन रहे हैं। लोग सेल्फी तो ले रहे हैं। लेकिन नदी की हालत पर कम ही ध्यान दे रहे हैं।
पहले भी उठ चुकी है आवाज
यमुना शुद्धिकरण को लेकर कई बार आंदोलन हुए। वर्ष 2015 में मथुरा से दिल्ली तक पदयात्रा भी निकली थी। करोड़ों रुपये खर्च हुए। योजनाएं बनीं। मगर जमीनी असर सीमित रहा। यमुना चार राज्यों से होकर गुजरती है। इनमें उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। हर जगह सीवेज और औद्योगिक कचरा बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों के अनुसार तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। सीवेज ट्रीटमेंट मजबूत हो। औद्योगिक अपशिष्ट पर सख्ती हो। और जनजागरूकता बढ़े। तभी यह पवित्र नदी फिर से स्वच्छ हो सकेगी।
