यमुना प्रदूषण रोकने की योजना ठप, 7 साल बाद भी STP नहीं; खेती और पानी पर संकट

Yamuna river pollution issue in Faridabad villages
फरीदाबाद में यमुना नदी के प्रदूषण को रोकने की योजना वर्षों से अटकी हुई है.

फरीदाबाद के यमुना किनारे गांवों में बिना ट्रीटमेंट का सीवेज नदी में बह रहा, प्रशासनिक फाइलों में अटका प्रोजेक्ट

सात साल बाद भी यमुना प्रदूषण रोकने की योजना अधर में


फरीदाबाद में यमुना नदी के प्रदूषण को रोकने की योजना पिछले सात वर्षों से सरकारी फाइलों में अटकी हुई है. प्रशासन लंबे समय से यमुना में जाने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए जमीन की तलाश कर रहा था. आखिरकार जमीन मिलने के बाद भी इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया गया. अब इस मामले में नई जांच शुरू कर दी गई है कि गांव में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP की जरूरत है या नहीं. यही बात लोगों के बीच सवाल खड़े कर रही है. अगर जरूरत का आकलन ही करना था, तो सात साल तक जमीन खोजने की प्रक्रिया क्यों चलती रही. इस बीच बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज लगातार यमुना नदी में बह रहा है. इससे नदी का पानी लगातार दूषित होता जा रहा है.

NGT के आदेशों के बाद भी नहीं लगा एक भी STP


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने वर्ष 2019 में यमुना नदी के किनारे बसे गांवों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद अब तक एक भी STP स्थापित नहीं किया गया है. प्रशासनिक स्तर पर योजना तो बनाई गई, लेकिन जमीन की उपलब्धता और अन्य प्रक्रियाओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को STP लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी. लेकिन अभी तक परियोजना शुरू नहीं हो पाई है. इसके कारण गांवों का गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है और प्रदूषण बढ़ता जा रहा है.

इमामउद्दीनपुर में मिली जमीन, फिर भी काम शुरू नहीं


यमुना नदी के किनारे पहला STP लगाने की योजना इमामउद्दीनपुर गांव में बनाई गई थी. यहां पंचायत की करीब दो एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित की गई है. जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी ने इस जमीन को जन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. प्रस्तावित STP से केवल इमामउद्दीनपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के शाहजहांपुर, फजुपुर और चांदपुर गांवों के सीवेज का भी ट्रीटमेंट किया जाना था. योजना के अनुसार ट्रीट किया गया पानी ही यमुना नदी में छोड़ा जाना था. हालांकि जमीन मिलने के बावजूद यह प्रोजेक्ट अभी भी शुरू नहीं हो पाया है.

खेती, मवेशियों और पीने के पानी पर असर


यमुना नदी के प्रदूषण का असर आसपास के गांवों की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है. नदी के किनारे बसे गांवों में मवेशी अक्सर सीधे यमुना का पानी पीते हैं. इसके कारण पशुओं के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ रहा है. इसके अलावा इसी पानी का इस्तेमाल हजारों हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के लिए किया जाता है. प्रदूषित पानी के कारण सब्जियों और अन्य फसलों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. यमुना किनारे लगाए गए रेनी वेल से शहर के लोगों को भी पानी की आपूर्ति की जाती है. ऐसे में प्रदूषण का असर सीधे आम लोगों तक पहुंच रहा है.

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