69000 शिक्षक भर्ती पर आरक्षित वर्ग का उबाल, लखनऊ में सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी

69000 शिक्षक भर्ती को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन
लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन

डिप्टी सीएम आवास घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प, सुप्रीम कोर्ट में सख्त पैरवी की मांग

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक माहौल गरमा गया है। राजधानी लखनऊ में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तक की नौबत आ गई।

लखनऊ में क्यों भड़का आंदोलन

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लंबे समय से 69000 शिक्षक भर्ती मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला बीते दस महीनों से लंबित है। वहीं, अन्य मामलों में त्वरित फैसले हो जाते हैं। इसी नाराजगी को लेकर बड़ी संख्या में SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवार सड़कों पर उतर आए।

डिप्टी सीएम आवास का घेराव

प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव करने की कोशिश की। हालांकि, पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद हालात बिगड़ गए। पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प देखने को मिली। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले दबाव

अभ्यर्थियों का कहना है कि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई होनी है। इसी को लेकर वे सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने सख्त पैरवी की मांग की है।

अभ्यर्थियों की नाराजगी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 69000 शिक्षक भर्ती से उनका भविष्य जुड़ा है। कई अभ्यर्थी वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। उम्र सीमा पार होने का डर भी उन्हें परेशान कर रहा है। उनका आरोप है कि देरी से आरक्षित वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है।

पुलिस रही अलर्ट

प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। लखनऊ के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें 4 फरवरी की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी हैं। अगर फैसला जल्द नहीं आता है, तो आंदोलन और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। साफ है कि 69000 शिक्षक भर्ती का मुद्दा आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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