शीतलहर के बीच सेवा का संकल्प, झुग्गी-झोपड़ियों तक पहुँची मदद
बारां। हाड़ौती अंचल में इन दिनों कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को प्रभावित कर रखा है। तापमान लगातार गिर रहा है। ऐसे कठिन समय में महाराणा प्रताप सेवा संघ ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए जरूरतमंदों के लिए राहत का कार्य किया। आधी रात के सन्नाटे और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच संघ के पदाधिकारी झुग्गी-झोपड़ियों में पहुंचे और असहाय परिवारों को कंबल वितरित किए।
कच्ची बस्तियों में पहुँचा सेवा का कारवां
महाराणा प्रताप सेवा संघ, जिला बारां के तत्वावधान में यह सेवा अभियान शहर के विभिन्न कच्चे इलाकों में चलाया गया। संघ की टीम तेल फैक्ट्री क्षेत्र, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, बाबजी नगर, तलावड़ा रोड और गोध्यापुरा जैसी बस्तियों में पहुंची। इन इलाकों में रहने वाले लोग ठंड से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में संघ ने वास्तविक जरूरतमंदों का चयन कर 51 महिला-पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों को ऊनी कंबल भेंट किए।
कंबल पाकर चेहरे पर लौटी मुस्कान
जैसे ही जरूरतमंदों को कंबल मिले, उनके चेहरों पर राहत और संतोष साफ दिखाई दिया। ठंड से बचाव के लिए मिला यह कंबल उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं था। कई परिवारों ने संघ के इस प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया। यह दृश्य सेवा और संवेदनशीलता का सजीव उदाहरण बन गया।
पदाधिकारियों की रही सक्रिय भूमिका
इस सेवा कार्य में संघ के कई पदाधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहे। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार गालव के नेतृत्व में जिला संरक्षक राजेंद्र ठाकुरिया और पुरुषोत्तम नामा, जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट सुरेश शर्मा, गोविंद शर्मा, रामेश्वर शर्मा (फतेहपुर), शशिकांत शर्मा, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण नागर, जिला मंत्री दिनेश कुमार जैन और नंदकिशोर शाक्यवाल सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। सभी ने अपने हाथों से कंबल वितरित कर सेवा भावना का परिचय दिया।
25 जनवरी को फिर होगा कंबल वितरण
सेवा संघ ने यह भी घोषणा की कि यह अभियान यहीं समाप्त नहीं होगा। आगामी 25 जनवरी, रविवार को सेवा अभियान का दूसरा चरण आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भी 51 अन्य जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किए जाएंगे। संघ का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति ठंड में असहाय न रहे।
नर सेवा ही नारायण सेवा
महाराणा प्रताप सेवा संघ का यह प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह संदेश देता है कि सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता से समाज की पीड़ा को कम किया जा सकता है। वास्तव में, नर सेवा ही नारायण सेवा है।
