सेहतमंद लोग भी हो सकते हैं इस जानलेवा कैंसर का शिकार, जानिए लक्षण और खतरे

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ग्लियोब्लास्टोमा दिमाग का सबसे खतरनाक और तेज़ी से फैलने वाला कैंसर है

ग्लियोब्लास्टोमा: दिमाग का सबसे खतरनाक और तेज़ी से फैलने वाला कैंसर

ग्लियोब्लास्टोमा क्या है और क्यों है खतरनाक?

ग्लियोब्लास्टोमा एक बेहद आक्रामक ब्रेन ट्यूमर है, जिसे मेडिकल भाषा में सबसे खतरनाक मस्तिष्क कैंसरों में गिना जाता है। यह बीमारी अक्सर अचानक सामने आती है और मरीज व परिवार के लिए बड़ा झटका बन जाती है। खास बात यह है कि यह कैंसर कमजोर या बीमार लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले लोगों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। यही कारण है कि इसे सबसे छलाकू और जानलेवा कैंसर माना जाता है।

ग्लियोब्लास्टोमा अन्य कैंसर से कैसे अलग है?

आमतौर पर ज्यादातर कैंसर शरीर के एक हिस्से में गांठ बनाते हैं, जिन्हें सर्जरी से निकाला जा सकता है। लेकिन ग्लियोब्लास्टोमा इस मामले में बिल्कुल अलग है। यह दिमाग के स्वस्थ टिश्यू में धीरे-धीरे अपनी जड़ें फैला देता है। इसके बेहद सूक्ष्म कैंसर सेल्स आसपास के हिस्सों में फैल जाते हैं, जो कई बार स्कैन में भी नजर नहीं आते। इसी वजह से सफल सर्जरी के बाद भी कुछ सेल्स रह जाते हैं और कैंसर दोबारा लौट आता है।

क्यों माना जाता है इसे मेडिकल इमरजेंसी?

डॉक्टरों के अनुसार ग्लियोब्लास्टोमा एक मेडिकल इमरजेंसी है। यह बहुत तेजी से बढ़ता है और दिमाग के अंदर दबाव बढ़ा देता है। रिसर्च बताती है कि इसके कुछ कैंसर सेल्स 48 घंटे में दोगुने हो सकते हैं। इसी कारण मरीज की हालत कुछ ही दिनों में तेजी से बिगड़ सकती है और इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

ग्लियोब्लास्टोमा के शुरुआती लक्षण

इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर आम सिरदर्द, माइग्रेन या तनाव समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। लेकिन लगातार बढ़ता सिरदर्द, अचानक दौरे पड़ना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने-समझने में परेशानी और याददाश्त में बदलाव गंभीर संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा संतुलन बिगड़ना और धुंधला दिखना भी खतरे की घंटी है।

जोखिम और बचाव को लेकर क्या कहते हैं डॉक्टर?

उम्र बढ़ने के साथ इस कैंसर का जोखिम बढ़ता है। जिन लोगों ने पहले सिर पर ज्यादा रेडिएशन लिया हो या जिन्हें कुछ दुर्लभ जेनेटिक बीमारियां हों, उनमें खतरा ज्यादा देखा गया है। हालांकि धूम्रपान, खान-पान या लाइफस्टाइल का इससे सीधा संबंध नहीं पाया गया है। यही वजह है कि इससे बचाव करना बेहद मुश्किल माना जाता है।

इलाज के विकल्प और उम्मीद

ग्लियोब्लास्टोमा के इलाज में सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है। ये उपाय बीमारी की रफ्तार को धीमा करते हैं और मरीज की जिंदगी की गुणवत्ता बेहतर बनाते हैं। हालांकि पूरी तरह ठीक होना अभी भी दुर्लभ है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर पहचान, जागरूकता और लगातार रिसर्च ही इस जानलेवा बीमारी से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।

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