IDFC First Bank की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा का नाम सामने आया
हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के बड़े बैंक घोटाले का खुलासा हुआ है। मामला सरकारी खातों से जुड़ा है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस केस में IDFC First Bank की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा का नाम सामने आया है। आरोप है कि बैंक अधिकारियों और उनके करीबी लोगों ने फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन किया।
एसीबी की कार्रवाई और कोर्ट का फैसला
हरियाणा एसीबी के डीजीपी डॉ. एएस चावला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मास्टरमाइंड रिषभ ऋषि और अभय से पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी ने दो आरोपियों के लिए 14 दिन का रिमांड मांगा था। जबकि अन्य दो के लिए 7 दिन की मांग की गई। हालांकि कोर्ट ने सभी को 7 दिन का रिमांड दिया।
भाई-बहन और जीजा की साजिश
जांच में सामने आया है कि अभय कुमार ने अपनी बहन स्वाति सिंगला और उनके पति अभिषेक सिंगला को भी प्लान में शामिल किया। आरोप है कि फर्जी कंपनियां बनाई गईं। इन कंपनियों के नाम पर सरकारी खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। रिषभ बैंक मैनेजर था। जबकि अभय रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था। बताया जा रहा है कि एक फर्जी फर्म ‘स्वास्तिक देश इंडिया’ के जरिए करीब 300 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ।
100 से ज्यादा खाते खोले और बंद किए
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने 100 से अधिक बैंक खाते खोले। फिर उनमें रकम ट्रांसफर कर निकासी की गई। बाद में खाते बंद कर दिए गए। एसीबी अब चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और गुरुग्राम तक जांच का दायरा बढ़ा रही है।
बिग बुल से प्रभावित थे आरोपी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी 1992 के चर्चित शेयर बाजार घोटाले के आरोपी हर्षद मेहता को अपना आदर्श मानते थे। हर्षद मेहता ने 1992 में करीब 5 हजार करोड़ रुपये का शेयर बाजार घोटाला किया था। माना जा रहा है कि उसी तर्ज पर इस बैंक धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। अब जांच एजेंसियां पैसों के अंतिम उपयोग और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की तलाश में जुटी हैं।
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