WEF 2026 से पहले तकनीकी बाधा, लेकिन एजेंडा और संदेश पर टिकी दुनिया की नजर
टेकऑफ के बाद आई तकनीकी खराबी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विशेष विमान एयरफोर्स-1 दावोस के लिए रवाना हुआ था। हालांकि, टेकऑफ के कुछ ही समय बाद विमान को वॉशिंगटन लौटना पड़ा। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह एहतियातन लिया गया। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लीविट के अनुसार, उड़ान के दौरान विमान में मामूली इलेक्ट्रिकल तकनीकी खराबी सामने आई। इसके बाद क्रू ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विमान वापस मोड़ने का निर्णय लिया।
दूसरे विमान से दावोस के लिए रवाना
हालांकि, यह रुकावट ज्यादा देर की नहीं रही। कुछ समय बाद डोनाल्ड ट्रम्प दूसरे विमान से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए। ऐसे में यह साफ हो गया कि तकनीकी समस्या ने उनके कार्यक्रम को टाला जरूर, लेकिन रोका नहीं। अब ट्रम्प वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में तय कार्यक्रम के अनुसार हिस्सा लेंगे।
WEF 2026 में ट्रम्प का अहम एजेंडा
दावोस में ट्रम्प का भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था बड़े बदलावों से गुजर रही है। व्यापार युद्ध, सुरक्षा संकट और सप्लाई चेन में अस्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। इसी वजह से ट्रम्प के हर बयान पर दुनिया की नजर टिकी हुई है। वे बुधवार शाम करीब सात बजे ग्रीनलैंड के भविष्य और वैश्विक रणनीति पर दुनिया को संबोधित करेंगे।
अमेरिका की आक्रामक नीति के संकेत
ट्रम्प के सलाहकारों का कहना है कि दावोस में वह साफ संदेश देंगे कि अमेरिका पुराने वैश्विक नियमों से आगे बढ़ चुका है। ग्रीनलैंड को लेकर उनका सख्त रुख पहले ही चर्चा में है। इसके अलावा यूरोप पर टैरिफ, NATO देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग और चीन-रूस के खिलाफ कड़ा रुख भी उनके भाषण का हिस्सा हो सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है दावोस
इस बार WEF 2026 में भारत की मौजूदगी भी मजबूत है। चार केंद्रीय मंत्री, छह राज्यों के मुख्यमंत्री और 100 से ज्यादा भारतीय कारोबारी दावोस पहुंचे हैं। ट्रम्प एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी भी करेंगे, जिसमें भारत के सात बड़े उद्योगपति शामिल होंगे। ऐसे में अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और निवेश पर बातचीत की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
क्यों खास है वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026
19 से 23 जनवरी तक चल रहे इस फोरम में 130 से ज्यादा देशों के 3,000 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। बैठक का थीम है “A Spirit of Dialogue”। युद्ध, वैश्विक मंदी की आशंका, जलवायु संकट और AI जैसे विषयों पर यहां होने वाली चर्चा आने वाले वर्षों की वैश्विक नीति तय कर सकती है। यही वजह है कि एयरफोर्स-1 की तकनीकी खराबी से ज्यादा, दावोस में ट्रम्प के संदेश को लेकर दुनिया उत्सुक है।
