नई दिल्ली में न्यूट्रिशन एक्सपर्ट वेनेका जैन के अनुसार अगर कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक रोज 3 लीटर पानी पीता है, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि पानी की जरूरत उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर भी निर्भर करती है। फिर भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
पहला हफ्ता: डिटॉक्स की शुरुआत
जैसे ही आप पानी की मात्रा बढ़ाते हैं, शुरुआत में पेशाब ज्यादा आने लगता है। हालांकि यह सामान्य प्रक्रिया है। दरअसल किडनी शरीर में जमा टॉक्सिन और अतिरिक्त नमक को बाहर निकालना शुरू कर देती है। धीरे-धीरे शरीर हल्का महसूस होने लगता है। सूजन कम होती है। कुछ लोगों को इस दौरान थकान में भी कमी महसूस होती है।
दूसरा हफ्ता: स्किन और पाचन में सुधार
दूसरे हफ्ते तक त्वचा में निखार दिखने लगता है। पानी की कमी से सूखी और बेजान दिखने वाली स्किन हाइड्रेट होने लगती है। इसके साथ ही पाचन तंत्र बेहतर काम करने लगता है। कब्ज की समस्या कम हो सकती है। बड़ी आंत को मल त्याग में आसानी होती है। इतना ही नहीं, शरीर भूख और प्यास के संकेतों को बेहतर तरीके से समझने लगता है।
तीसरा हफ्ता: फोकस और मांसपेशियों में सुधार
तीसरे हफ्ते तक ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। चूंकि खून का बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए पर्याप्त पानी से ब्रेन तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है। इससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ सकती है। मांसपेशियों में दर्द और अकड़न भी कम हो सकती है। शरीर अधिक लचीला महसूस होता है।
चौथा हफ्ता: फैट बर्निंग और समग्र सुधार
आखिरी हफ्ते तक बाल और नाखून भी स्वस्थ दिखने लगते हैं। पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनमें भी सुधार देखा जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि शरीर फैट को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से अपनाता है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में ‘लिपोलिसिस’ कहा जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पानी की मात्रा तय करें।
