गर्भावस्था के दौरान खुजली क्यों होती है, कब होती है खतरनाक और कैसे रखें मां-बच्चे को सुरक्षित
गर्भावस्था में खुजली क्यों होती है?
गर्भावस्था के दौरान खुजली होना एक आम समस्या मानी जाती है। हालांकि, कई महिलाएं इसे हल्के में ले लेती हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार या बढ़ती खुजली को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इसी कारण त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है।
त्वचा में खिंचाव और हार्मोनल बदलाव
सबसे पहले, पेट और स्तनों का आकार बढ़ने से त्वचा खिंचती है। इसके कारण रूखापन आता है और खुजली महसूस होती है। वहीं, हार्मोनल बदलाव त्वचा की नमी को कम कर देते हैं। इसलिए हल्की खुजली होना सामान्य माना जाता है।
PUPPP रैश की समस्या
इसके अलावा, गर्भावस्था के आखिरी महीनों में PUPPP रैश की समस्या हो सकती है। इसमें पेट पर लाल दाने निकलते हैं। हालांकि खुजली काफी तेज होती है, लेकिन यह डिलीवरी के बाद अपने-आप ठीक हो जाती है और बच्चे के लिए खतरनाक नहीं होती।
खुजली के गंभीर कारण
लेकिन कुछ मामलों में खुजली किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। उदाहरण के लिए, प्रेग्नेंसी में होने वाली लिवर की समस्या, जिसे ICP या कोलेस्टेसिस कहा जाता है। इस स्थिति में हथेलियों और पैरों के तलवों में बिना दाने के तेज खुजली होती है। खासकर रात में यह परेशानी बढ़ जाती है।
IVF प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ता है खतरा
IVF से हुई गर्भावस्था में हार्मोन का स्तर ज्यादा होता है। इसके कारण लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए IVF प्रेग्नेंसी में खुजली को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
यदि खुजली इतनी ज्यादा हो कि नींद न आए, या खुजली के साथ पीलिया, उल्टी या अत्यधिक थकान महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। समय पर जांच से मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
राहत और बचाव के उपाय
आखिर में, हल्की खुजली में मॉइस्चराइज़र, सूती कपड़े और पर्याप्त पानी पीना फायदेमंद होता है। वहीं, गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह से दवाइयों और नियमित जांच की जरूरत होती है।
