न्यायमूर्ति Subhash ने खुली अदालत में अपनी थकान और भूख का जिक्र किया

इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ की कार्यवाही
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में भारी कार्यभार के बीच जज ने फैसला सुरक्षित रखा।

लखनऊ खंडपीठ में कार्यभार का दबाव उजागर

Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ में हाल ही में एक भावुक क्षण देखने को मिला। न्यायमूर्ति Subhash Vidyarthi ने खुली अदालत में अपनी थकान और भूख का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक कार्यभार के कारण वह तत्काल फैसला लिखाने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बाद मामले का निर्णय सुरक्षित रख लिया गया।

235 मामलों की लंबी सूची

मंगलवार को अदालत में कुल 235 मामले सूचीबद्ध थे। दोपहर 4:15 बजे तक केवल 29 मामलों की सुनवाई हो पाई थी। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की तय समयसीमा को ध्यान में रखते हुए विशेष मामले की सुनवाई शुरू की गई। यह सुनवाई शाम 7:10 बजे तक लगातार चलती रही।

सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा

यह मामला चंद्रलेखा सिंह की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने ऋण वसूली अधिकरण (DRT) के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने पहले DRT का आदेश रद्द किया था। लेकिन बाद में Supreme Court of India ने इसे पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी 2026 तक मामले के निस्तारण का निर्देश दिया था।

जज की मार्मिक टिप्पणी

पूरे दिन की सुनवाई और तीन घंटे की बहस के बाद न्यायमूर्ति ने आदेश में दर्ज किया कि वह स्वयं को “भूखा, थका और शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने में अक्षम” महसूस कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में फैसला लिखाना उचित नहीं होगा। इसलिए आदेश सुरक्षित रखा गया।

न्यायपालिका पर बढ़ता दबाव

यह घटना भारतीय न्यायपालिका पर बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित मामलों की संख्या और सीमित न्यायाधीशों की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल मामले में अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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