महंगाई की मार: सोना-चांदी महंगे होते ही आयुर्वेदिक दवाएं भी हुईं आसमान पर

सोना-चांदी महंगी होने से आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी
महंगाई की मार से आयुर्वेदिक दवाएं आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं

शक्तिवर्धक स्वर्ण भस्म 7 हजार महंगी, डायबिटीज की दवा और च्यवनप्राश ने भी बढ़ाया बोझ

नई दिल्ली। महंगाई की आग अब आयुर्वेदिक दवाओं तक पहुंच गई है। सोना और चांदी महंगे होने का सीधा असर उन दवाओं पर पड़ा है, जिनके निर्माण में कीमती धातुओं का इस्तेमाल होता है। कमजोरी दूर करने वाली प्रसिद्ध शक्तिवर्धक दवा स्वर्ण भस्म की कीमत में एक साल के भीतर करीब 7 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जानकारी के मुताबिक, स्वर्ण भस्म की कीमत पिछले साल जहां 19 हजार रुपये थी, वहीं अब बढ़कर 26 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि दवा में इस्तेमाल होने वाले शुद्ध सोने और चांदी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह है।

महंगाई की मार सिर्फ शक्तिवर्धक दवाओं तक सीमित नहीं रही। डायबिटीज की आयुर्वेदिक दवा ‘वसंत कुसमाकर’ भी करीब 1100 रुपये महंगी हो गई है। पहले जो दवा मरीजों की पहुंच में थी, अब उसकी कीमत आम लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी है।

वहीं सर्दियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली संजीवनी मानी जाने वाली च्यवनप्राश भी अब सस्ता नहीं रहा। कच्चे माल, जड़ी-बूटियों और पैकेजिंग लागत बढ़ने से इसकी कीमतों में भी इजाफा हुआ है।

आयुर्वेदिक दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सोना-चांदी और हर्बल कच्चे माल की कीमतों में यही तेजी बनी रही, तो आने वाले समय में दवाएं और महंगी हो सकती हैं। इससे डायबिटीज और कमजोरी से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।

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