118 सीटों के साथ BJP+ बहुमत से सिर्फ 4 आगे, उद्धव के बयान से हलचल; शिंदे ने पार्षदों को होटल में रखा
BMC Mayor Election Buzz
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजे आने के बाद अब असली लड़ाई मेयर पद को लेकर शुरू हो गई है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा बेहद करीबी होने के कारण बीएमसी में “बाकी है खेल” की चर्चा तेज हो गई है। सियासत में किसी भी वक्त समीकरण बदल सकते हैं और इसी वजह से हर दल अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटा दिख रहा है।
फिलहाल बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं और बहुमत के लिए 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। नतीजों के अनुसार BJP ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। इस तरह सत्ताधारी गठबंधन का कुल आंकड़ा 118 पहुंचता है, जो बहुमत से सिर्फ 4 अधिक है। यही कारण है कि मेयर को लेकर खींचतान और सस्पेंस दोनों बने हुए हैं।
शिंदे ने पार्षदों को होटल में रखा
सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को आशंका है कि कम मार्जिन होने की वजह से उनके पार्षदों में “दल-बदल” का खतरा बढ़ सकता है। इसी बीच खबर है कि उन्होंने अपने जीते हुए पार्षदों को तीन दिनों के लिए बांद्रा स्थित एक फाइव स्टार होटल में ठहराया है, ताकि किसी तरह की तोड़फोड़ या खरीद-फरोख्त की संभावना को रोका जा सके। राजनीतिक हलकों में इसे एहतियाती कदम माना जा रहा है।
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उद्धव ठाकरे की ‘गुगली’ से बढ़ी हलचल
वहीं शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बयान ने सियासी माहौल में खलबली मचा दी है। उन्होंने कहा कि उनका सपना मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर देखना है और अगर भगवान ने चाहा तो यह सच होगा। इस बयान के बाद शिंदे खेमे में चिंता बढ़ने की चर्चा है।
BJP-शिंदे के बीच मेयर को लेकर तकरार
दूसरी ओर गठबंधन के अंदर भी मेयर पद को लेकर खींचतान की खबरें हैं। शिंदे गुट की मांग बताई जा रही है कि मेयर का कार्यकाल BJP और शिवसेना के बीच ढाई-ढाई साल बांटा जाए। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मेयर का फैसला शिवसेना से बातचीत के बाद ही होगा।
क्या पलट सकता है गेम?
संभावित गणित पर नजर डालें तो UBT (65) और MNS (6) मिलकर 71 सीटों तक पहुंचते हैं। कांग्रेस (24), अन्य छोटे दलों की सीटों के साथ यह आंकड़ा बढ़ता जरूर है, लेकिन बहुमत के लिए अब भी कुछ पार्षदों की जरूरत रहेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि किसी भी बड़े बदलाव की संभावना “बहुत कठिन” है, लेकिन करीबी आंकड़ों की वजह से राजनीतिक हलचल लगातार बनी रहेगी।
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