अमेरिकी टैरिफ के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत, 5% विकास दर दर्ज

Chinese economic growth reaches 5 percent
मजबूत निर्यात के दम पर चीन की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती

निर्यात बना सबसे बड़ा सहारा, घरेलू मांग की कमजोरी के बावजूद चीन ने साधा संतुलन

अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार तनाव के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था ने साल 2025 में स्थिर प्रदर्शन किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीनी अर्थव्यवस्था की सालाना विकास दर पांच प्रतिशत रही। यह आंकड़ा सरकार के तय लक्ष्य के काफी करीब है। हालांकि, साल के अंत में आर्थिक रफ्तार में कुछ सुस्ती जरूर देखने को मिली। इसके बावजूद मजबूत निर्यात ने कमजोर घरेलू मांग की भरपाई कर दी।

आखिरी तिमाही में सुस्ती के संकेत

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की आखिरी तिमाही में चीन की विकास दर घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई। यह 2022 के अंत, यानी कोविड-19 महामारी के बाद की सबसे धीमी तिमाही वृद्धि मानी जा रही है। इससे पहले की तिमाही में यह दर 4.8 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से जारी मंदी और महामारी के बाद की आर्थिक चुनौतियों का असर अब भी बना हुआ है।

घरेलू मांग बनी कमजोरी की बड़ी वजह

चीन की सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं लागू कीं। इसके बावजूद घरेलू उपभोग और निजी निवेश उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सके। उपभोक्ता खर्च में सुस्ती और प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी ने ग्रोथ पर दबाव बनाए रखा। इसी वजह से घरेलू मांग आर्थिक विकास का मजबूत आधार नहीं बन पाई।

निर्यात ने संभाली अर्थव्यवस्था

ऐसे हालात में निर्यात चीन की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा। मजबूत वैश्विक मांग और सप्लाई चेन में चीन की मजबूत पकड़ ने इसे बढ़त दिलाई। साल 2025 में चीन ने करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष दर्ज किया। यह आंकड़ा दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी उत्पादों की मांग बनी हुई है।

आगे की राह आसान नहीं

हालांकि सालाना विकास दर संतोषजनक रही, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे की राह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिकी टैरिफ और घरेलू मांग की कमजोरी चीन की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं। फिलहाल, निर्यात के दम पर चीन ने संतुलन साधा है। लेकिन लंबी अवधि में घरेलू मांग को मजबूत करना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

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