सरकारी सर्वे का खौफनाक खुलासा, गांवों में शिक्षा पर 2.5% और गुटखा पर 4% खर्च
ग्रामीण भारत की चौंकाने वाली हकीकत
कहा जाता है कि असली भारत गांवों में बसता है, लेकिन अगर ताजा सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो यह भारत तेजी से “गुटखा नेशन” बनता दिख रहा है। सरकार द्वारा कराए गए घरेलू उपभोग एवं खर्च सर्वेक्षण (HCES) में एक बेहद चिंताजनक सच सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण भारत में लोग अपनी कुल कमाई का सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सा पढ़ाई-लिखाई पर खर्च करते हैं, जबकि 4 फीसदी रकम गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों पर उड़ा देते हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि देश के भविष्य के लिए भी खतरे की घंटी माना जा रहा है।
शिक्षा पीछे, तंबाकू आगे
सर्वे बताता है कि गरीब और ग्रामीण परिवारों में तंबाकू का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। एक तरफ सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर परिवारों की प्राथमिकताएं इन प्रयासों को कमजोर कर रही हैं। शिक्षा पर घटता खर्च आने वाली पीढ़ी के भविष्य को अंधकार की ओर ले जाता दिख रहा है, जबकि तंबाकू पर बढ़ता खर्च बीमारियों का खतरा और बढ़ा रहा है।
महंगाई के साथ बढ़ी तंबाकू की लत
महंगाई के लिहाज से देखें तो वित्तवर्ष 2011-12 से 2023-24 के बीच ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति तंबाकू खर्च 58 फीसदी बढ़ गया है। शहरी इलाकों में यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा, करीब 77 फीसदी रही है। अब तंबाकू ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक प्रति व्यक्ति खर्च का 1.5 फीसदी और शहरी इलाकों में 1 फीसदी हिस्सा बन चुका है। ये आंकड़े भले छोटे लगें, लेकिन तंबाकू सेवन करने वाले परिवारों की संख्या में तेज उछाल ने चिंता बढ़ा दी है।
शहरों में हालात और बिगड़े
ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी भारत में भी तंबाकू की पकड़ मजबूत हुई है। शहरों में तंबाकू सेवन करने वाले परिवारों की संख्या 59 फीसदी बढ़ी है। पहले जहां 34.9 फीसदी शहरी परिवार तंबाकू का इस्तेमाल करते थे, अब यह आंकड़ा 45.6 फीसदी तक पहुंच चुका है। सिगरेट के साथ-साथ गुटखा भी शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
गांवों में गुटखा सबसे बड़ा खतरा
सर्वे का सबसे बड़ा खुलासा गुटखा को लेकर हुआ है। ग्रामीण भारत में गुटखा खाने वाले परिवारों की हिस्सेदारी करीब छह गुना बढ़ गई है। पहले यह 5.3 फीसदी थी, जो अब 30.4 फीसदी तक पहुंच गई है। आज ग्रामीण इलाकों में तंबाकू पर होने वाले कुल खर्च का 41 फीसदी सिर्फ गुटखा पर होता है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में गुटखा का इस्तेमाल सबसे ज्यादा है। ग्रामीण एमपी में हर 10 में से 6 परिवार गुटखा खाते हैं, जबकि यूपी में यह आंकड़ा 50 फीसदी से ऊपर है। शहरी इलाकों में भी यही रुझान दिखने लगा है।
गरीब परिवार सबसे ज्यादा चपेट में
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि तंबाकू का सेवन गरीब परिवारों में सबसे ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में निचले 40 फीसदी परिवारों में से 70 फीसदी से ज्यादा तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। यह रुझान भारत के सामाजिक और आर्थिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
