हाईकोर्ट के आदेश में आंशिक राहत, लेकिन समयसीमा तय
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा संवैधानिक फैसला आया है। Supreme Court of India ने स्पष्ट किया है कि 31 मई से पहले हर हाल में पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव करवाए जाएं। दरअसल, Himachal Pradesh सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। पहले हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल तक चुनाव कराने को कहा था। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है। लेकिन साथ ही अंतिम समयसीमा भी तय कर दी है।
31 मार्च तक रोस्टर जारी करने का आदेश
सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस यमाल्या बागची की खंडपीठ ने की। अदालत ने साफ कहा कि 31 मार्च तक हर हाल में आरक्षण रोस्टर जारी किया जाए। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए। इससे पहले 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था। इसलिए चुनाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज थी।
सरकार और चुनाव आयोग आमने-सामने
सरकार ने अपनी एसएलपी में दलील दी थी कि हाईकोर्ट ने रोस्टर जारी करने के लिए केवल चार दिन का समय दिया। जबकि 2021 के एक मामले में आपत्तियां सुनने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। इस विरोधाभास का हवाला देते हुए सरकार ने राहत मांगी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय तो बढ़ाया, लेकिन चुनाव टालने की अनुमति नहीं दी।
आपदा का हवाला और सियासी घमासान
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में पंचायत चुनाव प्रस्तावित थे। लेकिन सरकार ने आपदा का हवाला देते हुए चुनाव टालने की कोशिश की थी। इसके बाद मामला अदालत पहुंच गया। पहले सरकार ने कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी। लेकिन बाद में उसने यूटर्न लेते हुए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इससे राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
