क्लॉज 8 से बदल सकता है ट्रेड डील का खेल
नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील में अचानक नया मोड़ आ गया है. हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के टैरिफ फैसले को निरस्त कर दिया. इसके बाद भारत को समझौते की शर्तें दोबारा तय करने का मौका मिल गया है. दरअसल, दोनों देशों के बीच जो अंतरिम समझौता हुआ था, उसमें क्लॉज 8 जोड़ा गया था. यह प्रावधान भारत ने खास रणनीति के तहत शामिल कराया था. अब वही क्लॉज भारत के लिए मजबूत हथियार बनता दिख रहा है.
क्या है क्लॉज 8 और क्यों है अहम
क्लॉज 8 के मुताबिक, अगर किसी भी देश के टैरिफ में बदलाव होता है तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा कर सकता है. उस समय ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत में मामला चल रहा था. इसलिए भारत ने एहतियात के तौर पर यह शर्त रखी थी. अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. इसके बाद टैरिफ दरों में बदलाव हुआ. पहले 18 फीसदी की चर्चा थी, जबकि अब 15 फीसदी टैरिफ लागू किया गया है. यही बदलाव भारत को क्लॉज 8 सक्रिय करने का आधार देता है.
भारत को कैसे मिल सकता है फायदा
अगर भारत क्लॉज 8 का इस्तेमाल करता है, तो वह अमेरिकी सामान पर टैरिफ दोबारा तय कर सकता है. साथ ही 500 अरब डॉलर की खरीद जैसी शर्तों पर भी पुनर्विचार संभव है. पहले समझौते में अमेरिका को ज्यादा फायदा दिख रहा था. अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स को भारतीय बाजार में आसान एंट्री मिलती. एग्री प्रोडक्ट्स जैसे सोरघम, ट्री नट्स, फ्रूट, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स पर भी टैरिफ कम होते. इसके अलावा भारत पर ऊर्जा, एयरक्राफ्ट और टेक्नोलॉजी उत्पादों की बड़ी खरीद का दबाव था. इससे अमेरिकी एक्सपोर्ट और रोजगार को बढ़ावा मिलता.
ट्रंप की चेतावनी और आगे की रणनीति
हालांकि, ट्रंप ने बिना नाम लिए चेतावनी दी है कि अगर कोई देश डील से पीछे हटेगा तो परिणाम भुगतने होंगे. फिलहाल भारत ने बातचीत को होल्ड पर रखा है. अब सवाल यह है कि भारत कितनी सख्ती दिखाता है. क्योंकि ज्यादा दबाव से डील अटक भी सकती है. फिर भी मौजूदा हालात में India US trade deal clause भारत को रणनीतिक बढ़त देता नजर आ रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नई दिल्ली इस मौके को कैसे भुनाती है और क्या वाकई डील भारत की शर्तों पर आगे बढ़ती है.
