LHS 1903 के पास मिला हैरान करने वाला ग्रह सिस्टम
नई दिल्ली। ब्रह्मांड एक बार फिर वैज्ञानिकों को चौंका रहा है। इस बार खोजा गया है एक ऐसा Inside-Out Solar System, जिसने ग्रह निर्माण की पुरानी थ्योरी को चुनौती दे दी है। यह अनोखा सिस्टम LHS 1903 नाम के लाल बौने तारे के आसपास मिला है वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तारा हमारी आकाशगंगा Milky Way के डिस्क क्षेत्र में स्थित है। यह सूर्य से छोटा और कम चमकदार है। हालांकि, इसके ग्रहों की बनावट ने सबको हैरान कर दिया है।
क्या है Inside-Out Solar System का रहस्य?
सामान्यतः, किसी भी सौर मंडल में छोटे पथरीले ग्रह तारे के पास होते हैं। वहीं, बड़े गैसीय ग्रह दूर पाए जाते हैं। लेकिन LHS 1903 के सिस्टम में क्रम बिल्कुल अलग है। सबसे पहले तारे के पास एक पथरीला ग्रह है। इसके बाद दो बड़े गैसीय ग्रह मौजूद हैं। फिर, सबसे बाहरी हिस्से में दोबारा एक छोटा पथरीला ग्रह पाया गया है। इस तरह की संरचना को वैज्ञानिकों ने “Inside-Out” नाम दिया है। क्योंकि यह पारंपरिक क्रम के उलट है।
क्यों फेल हुई पुरानी थ्योरी?
अब तक माना जाता था कि तारे की तेज रेडिएशन पास की गैस को उड़ा देती है। इसलिए वहां सिर्फ ठोस चट्टानी ग्रह बनते हैं। दूसरी ओर, दूर के ठंडे इलाकों में गैस जमा होकर गैस जायंट बनते हैं। लेकिन LHS 1903 के बाहरी हिस्से में मिला पथरीला ग्रह इस नियम को नहीं मानता। इसलिए वैज्ञानिकों ने नई संभावनाओं पर विचार किया।
नई थ्योरी क्या कहती है?
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस सिस्टम में ग्रह एक साथ नहीं बने। बल्कि, वे एक-एक करके बने। जब सबसे बाहरी ग्रह बनने की बारी आई, तब तक सिस्टम की गैस खत्म हो चुकी थी। इसलिए वह गैस जायंट नहीं बन पाया। परिणामस्वरूप, वह पथरीला ही रह गया। यह खोज यूरोपीय स्पेस एजेंसी के CHEOPS टेलिस्कोप से संभव हुई।
क्या बदलनी होंगी विज्ञान की किताबें?
1990 के दशक से अब तक हजारों एक्सोप्लैनेट्स खोजे जा चुके हैं। फिर भी, हर नई खोज नई चुनौती लेकर आती है। LHS 1903 का यह Inside-Out Solar System संकेत देता है कि ब्रह्मांड में ग्रह बनने के कई तरीके हो सकते हैं। इसलिए, वैज्ञानिक अब अपनी पुरानी थ्योरी पर दोबारा विचार कर रहे हैं।
