बीमित किसानों और रकबे में गिरावट, मुआवजा देरी बना बड़ा कारण
जिले में PM Fasal Bima Yojana को लेकर किसानों की रुचि लगातार घट रही है। इस रबी सीजन में बीमित किसानों और कृषि भूमि के आंकड़ों में साफ गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में करीब तीन प्रतिशत कमी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, इस बार 7,725 एकड़ कम क्षेत्र का बीमा कराया गया। वहीं, 1,480 किसानों ने योजना से दूरी बना ली। इस वर्ष 15,359 किसानों ने फसल बीमा कराया। जबकि पिछले साल यह संख्या 16,839 थी। इसी तरह बीमित रकबा घटकर 47,825 एकड़ रह गया। जबकि 2024 में यह 55,550 एकड़ था। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि किसान धीरे-धीरे योजना से भरोसा खो रहे हैं।
समय पर मुआवजा नहीं, बढ़ी नाराजगी
किसानों का कहना है कि फसल खराब होने पर मुआवजा समय पर नहीं मिलता। इसलिए उनका विश्वास कमजोर हुआ है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि क्लेम प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। इसके अलावा, सर्वे में भी अनियमितता की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों का दावा है कि वास्तविक नुकसान का आकलन सही तरीके से नहीं होता। परिणामस्वरूप, उन्हें पूरी क्षतिपूर्ति नहीं मिल पाती। यही कारण है कि किसान बीमा कराने से कतरा रहे हैं।
बाढड़ा में 200 दिन से धरना
जिले के बाढड़ा कस्बे में किसान 200 दिन से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। वे बीमा क्लेम में कथित घोटाले की जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही, 2023 के बकाया मुआवजे की भी मांग उठाई जा रही है। किसानों ने सरकार और बीमा कंपनियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
कुल क्षेत्र का सिर्फ 17.51% बीमित
मौजूदा रबी सीजन में जिले में करीब 2.73 लाख एकड़ में खेती हुई। इसमें से केवल 47,825 एकड़ का ही बीमा हुआ। यानी कुल क्षेत्र का मात्र 17.51 प्रतिशत। पहले किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए बीमा अनिवार्य था। लेकिन अब इसे स्वैच्छिक कर दिया गया है। इसके बाद से बीमित क्षेत्र में गिरावट आई है। कृषि विभाग के अनुसार, बीमा कराने की अंतिम तिथि पहले 15 जनवरी थी। बाद में इसे बढ़ाकर 31 जनवरी किया गया। फिर भी, आंकड़े बताते हैं कि किसानों का भरोसा कमजोर पड़ा है। आने वाले समय में सरकार और बीमा कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
