जम्मू-कश्मीर उपमुख्यमंत्री की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, बुलेट प्रूफ गाड़ी और जैमर पर उठी चिंता
OSD के पत्र से उठा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जम्मू-कश्मीर में उपमुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है. उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. उनके ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी यानी OSD सुरेश चंद्र ने एसएसपी सिक्योरिटी जम्मू को पत्र लिखकर सुरक्षा काफिले की स्थिति पर चिंता जताई है. पत्र में दावा किया गया है कि उपमुख्यमंत्री को दी गई बुलेट प्रूफ गाड़ी, पायलट और स्काउट वाहन मैकेनिकल रूप से भरोसेमंद नहीं हैं. इतना ही नहीं, उपमुख्यमंत्री के सुरक्षा काफिले से जैमर वाहन भी करीब छह महीने पहले हटा लिया गया था. इसके बाद से कई बार अनुरोध करने के बावजूद यह वाहन दोबारा उपलब्ध नहीं कराया गया है. ऐसे में आतंकवाद प्रभावित और सीमावर्ती क्षेत्रों के दौरों के दौरान सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है.
संवेदनशील इलाकों के दौरे के बीच बढ़ी चिंता
पत्र में कहा गया है कि मौजूदा समय में जो वाहन उपमुख्यमंत्री के सुरक्षा काफिले में तैनात हैं, वे किसी भी समय धोखा दे सकते हैं. हाल ही में इन वाहनों की वजह से कुछ गंभीर और लगभग जानलेवा घटनाएं भी सामने आई हैं. इसलिए OSD ने सुरक्षा काफिले की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री अक्सर संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करते रहते हैं. ऐसे में बिना भरोसेमंद सुरक्षा व्यवस्था के उनका आना-जाना जोखिम भरा हो सकता है. यही वजह है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और वाहनों को बदलने की मांग दोहराई गई है.
नौशहरा दौरे का भी किया गया जिक्र
OSD के पत्र में 15 मार्च को हुए उपमुख्यमंत्री के नौशहरा और राजौरी दौरे का भी उल्लेख किया गया है. बताया गया है कि इस दौरे के लिए 13 मार्च को ही प्रशासन को सूचना दे दी गई थी. साथ ही सुरक्षा काफिले में बुलेट रेसिस्टेंट फॉर्च्यूनर गाड़ी शामिल करने का अनुरोध किया गया था. हालांकि यह मांग स्वीकार नहीं की गई. पत्र में यह भी कहा गया है कि हाल ही में जम्मू के रॉयल पार्क इलाके में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुई फायरिंग की घटना के बाद सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत थी. इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया.
अधिकारियों का जवाब और आगे की स्थिति
इस मामले पर जब संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. हालांकि जम्मू-कश्मीर पुलिस के सिक्योरिटी विंग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बुलेट प्रूफ वाहन और जैमर सीमित संख्या में उपलब्ध हैं. इसलिए उन्हें सुरक्षा खतरे के आकलन और आवश्यकता के आधार पर ही तैनात किया जाता है. इसके बावजूद OSD के पत्र के सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं.
