देवरानी-जेठानी की सोच ने बदल दी तकदीर

घर के कमरे में ऑयस्टर मशरूम की खेती करती महिलाएं
10×12 फीट के कमरे में ऑयस्टर मशरूम उगाकर देवरानी-जेठानी की शानदार कमाई।

गांव में रहकर खड़ा किया सफल कारोबार

Jamshedpur के Bodam प्रखंड की डिगी पंचायत की रहने वाली संध्या रानी महतो और नीलमणि महतो ने यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए शहर जाना जरूरी नहीं। इन देवरानी-जेठानी की जोड़ी ने अपने घर के एक 10×12 फीट के खाली कमरे को ही कमाई का जरिया बना लिया। आज वे उसी छोटे से कमरे में Oyster mushroom की खेती कर हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं।

150 बैग से हर महीने अच्छी आमदनी

फिलहाल उनके पास करीब 150 मशरूम बैग हैं। हर बैग से लगभग 2 किलो तक उत्पादन हो जाता है। खास बात यह है कि इस खेती में न ज्यादा जमीन की जरूरत है और न ही भारी निवेश की। संध्या और नीलमणि बताती हैं कि ऑयस्टर मशरूम की खेती में बहुत कम मेहनत लगती है। केवल 15 से 20 दिन में एक बार हल्का स्प्रे करना होता है। इसके अलावा ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं पड़ती। इसी वजह से वे घर का काम, खेती-किसानी और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ इस व्यवसाय को भी आसानी से संभाल लेती हैं।

बाजार में 400–450 रुपये प्रति किलो कीमत

उनके मशरूम की क्वालिटी इतनी अच्छी है कि स्थानीय बाजार के अलावा होटल और ढाबों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं। बाजार में यह मशरूम ₹400 से ₹450 प्रति किलो तक बिक रहा है। कई बार तो शहर से लोग खुद गांव पहुंचकर खरीदारी करते हैं। इससे यह साबित होता है कि गांव में तैयार उत्पाद भी शहर के बाजार में मजबूत पहचान बना सकते हैं।

गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा

आज जब बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, ऐसे समय में यह कहानी प्रेरणा देती है। संध्या और नीलमणि का मानना है कि अगर गांव में रहकर वैज्ञानिक तरीके से खेती या स्वरोजगार किया जाए तो शहर जाने की मजबूरी खत्म हो सकती है। उनकी यह सफलता ग्रामीण इलाकों, खासकर बोड़ाम प्रखंड के लोगों के लिए एक मिसाल बन गई है। यह कहानी हर उस व्यक्ति को संदेश देती है जो गांव में रहकर कुछ बड़ा करने का सपना देखता है — सही सोच, थोड़ी हिम्मत और मेहनत से तकदीर बदली जा सकती है।

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