जमुई।
अरुण भारती ने संसद में बिहार के जमुई क्षेत्र में रेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम मांगें उठाईं।
उन्होंने झाझा-जमुई रेलखंड को हाई-कैपेसिटी कॉरिडोर में बदलने की मांग प्रमुख रूप से रखी।
नई रेल लाइनों के निर्माण पर जोर
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में देखें तो, सांसद ने कई नई रेल परियोजनाओं को जल्द शुरू करने की मांग की।
इनमें झाझा-बटिया (20 किमी) और बैजनाथपुर-अंडोली-झाझा बायपास (5 किमी) प्रमुख हैं।
लंबित प्रोजेक्ट्स को गति देने की मांग
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, सीतारामपुर से झाझा तक चौथी लाइन और सीतारामपुर से किउल तक तीसरी लाइन के निर्माण कार्य को तेज करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा बरियारपुर-मननपुर (68 किमी) और नवादा-लक्ष्मीपुर (137 किमी) रेल परियोजनाओं को जल्द स्वीकृति देने की मांग भी रखी गई।
छोटे स्टेशनों पर ठहराव की मांग
सांसद ने कटौना और चौरा हाल्ट पर ट्रेनों के ठहराव की जरूरत बताई।
साथ ही जमुई और झाझा स्टेशनों पर वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस के ठहराव की मांग की गई।
‘जीवन रेखा’ परियोजना को बढ़ाने की मांग
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में देखें तो, नवादा-पकरीबरावां-जमुई रेल लाइन को क्षेत्र की “जीवन रेखा” बताते हुए इसके लिए बजट बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
केंद्र सरकार की योजनाओं की सराहना
नरेंद्र मोदी और अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में रेलवे में हो रहे विकास की भी सराहना की गई। सांसद ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में रेलवे के लिए रिकॉर्ड 2.93 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय यह दिखाता है कि सरकार रेलवे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बिहार में 52 मेगा प्रोजेक्ट्स पर काम
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, बिहार को इस बजट में 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन मिला है।
राज्य में 52 मेगा परियोजनाओं पर काम जारी है, जिससे कनेक्टिविटी को मजबूती मिल रही है।
बड़े रेल पुलों से बढ़ी कनेक्टिविटी
मुंगेर, कोसी और पटना जैसे क्षेत्रों में बने बड़े रेल पुलों ने राज्य की कनेक्टिविटी को नया आयाम दिया है।
