करौली के सीआरसी निदेशक का मुंबई में सम्मान, दिव्यांगजनों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

CRC Karoli director Neeraj Madhukar honoured in Mumbai
दिव्यांगजनों के पुनर्वास में उत्कृष्ट योगदान के लिए नीरज मधुकर को सम्मानित किया गया

नीता अंबानी के हाथों सम्मानित हुए नीरज मधुकर, पुनर्वास कार्यों को मिली राष्ट्रीय पहचान

दिव्यांग सशक्तिकरण को मिला राष्ट्रीय मंच

करौली स्थित समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (सीआरसी) के निदेशक नीरज मधुकर को मुंबई में विशेष सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट, समर्पित और नवाचारी कार्यों के लिए प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से न सिर्फ करौली बल्कि पूरे राजस्थान को गौरव महसूस हुआ है।

नीता अंबानी ने किया सम्मानित

यह सम्मान समारोह मुंबई में आयोजित हुआ, जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने नीरज मधुकर को सम्मानित किया। कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इस अवसर पर दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले कार्यों की सराहना की गई। यह सम्मान सीआरसी जयपुर द्वारा बीते दो वर्षों में किए गए प्रभावशाली प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता माना जा रहा है।

40 हजार से अधिक दिव्यांगों को मिली सेवाएं

सीआरसी जयपुर, भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत कार्यरत है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। निदेशक नीरज मधुकर के कुशल नेतृत्व में, पिछले डेढ़ वर्ष में 40 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को विभिन्न सेवाएं प्रदान की गई हैं। इनमें तकनीकी सहायता, समावेशी शिक्षा, चिकित्सीय सहयोग और सामाजिक पुनर्वास शामिल हैं।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित संस्थान

सीआरसी में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, श्रवण एवं दृष्टि जांच, संकेत भाषा प्रशिक्षण और कृत्रिम अंग निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही एलिम्को के सहयोग से दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण भी वितरित किए गए हैं। यह सभी सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं, जिससे जरूरतमंदों को सीधा लाभ मिलता है।

ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाया दायरा

संस्थान द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं का विस्तार करने के लिए नियमित शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा शून्य से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए एक विशेष शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र भी विकसित किया जा रहा है। यह पहल दिव्यांग बच्चों के शुरुआती उपचार और विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

प्रेरणा बना सम्मान

नीरज मधुकर को मिला यह सम्मान दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील सोच और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि आने वाले समय में सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

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