काशी में जलती चिताओं की भस्म से होली, 3 लाख श्रद्धालु पहुंचे

मणिकर्णिका घाट पर भस्म की होली खेलते नागा साधु
मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से होली खेलते साधु-संन्यासी।

मणिकर्णिका घाट पर अनोखा रंगोत्सव

धर्मनगरी काशी में इस बार भी मसाने की होली का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। Manikarnika Ghat पर जलती चिताओं के बीच भस्म की होली खेली गई। एक ओर अंतिम संस्कार चल रहे थे। दूसरी ओर साधु-संन्यासी भस्म और गुलाल में सराबोर नजर आए।

डमरू की गूंज और बाबा मसान नाथ का पूजन

शनिवार सुबह रंगोत्सव की शुरुआत डमरू वादन से हुई। डमरू की गूंज के बीच नागा साधु घाट पर पहुंचे। उन्होंने बाबा मसान नाथ को भस्म, अबीर और गुलाल अर्पित किया। इसके बाद भस्म की होली खेली गई। कई साधु गले में नरमुंडों की माला पहने दिखे। कुछ चश्मा लगाकर डमरू की थाप पर नाचते नजर आए।

श्रद्धा और आस्था का अनोखा संगम

घाट पर जश्न के बीच से शवयात्राएं गुजरती रहीं। फिर भी आस्था का रंग फीका नहीं पड़ा। आमतौर पर जिस राख से लोग दूरी बनाते हैं। आज उसी राख को लोग माथे पर लगाते दिखे। विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बने।
वे भस्म और रंग में झूमते नजर आए।

3 लाख से अधिक पहुंचे श्रद्धालु

प्रशासन के अनुसार मसाने की होली में तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचे। घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। काशी की यह परंपरा जीवन और मृत्यु के दर्शन को एक साथ प्रस्तुत करती है। यही वजह है कि मसाने की होली देश-दुनिया में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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