दूल्हा बनेंगे बाबा विश्वनाथ: काशी में शिव विवाह की पावन शुरुआत

काशी में बाबा विश्वनाथ को सगुन की हल्दी अर्पित करते श्रद्धालु
काशी में शिव विवाह से पूर्व बाबा विश्वनाथ को सगुन की हल्दी अर्पित

सगुन की हल्दी से महकी शिव नगरी, महाशिवरात्रि से पहले शुरू हुई सदियों पुरानी परंपरा

वाराणसी। महाशिवरात्रि से पहले काशी में शिव विवाह की पावन रस्मों का शुभारंभ हो गया है। शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ को सगुन की हल्दी अर्पित की जाएगी। इसके साथ ही उन्हें दूल्हे के रूप में सजाया जाएगा। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह से निभाई जाती है। भक्तों में विशेष उत्साह है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक माहौल बना हुआ है। हर-हर महादेव के जयघोष से शिव नगरी गूंज उठी है।

बांसफाटक से निकलेगी पारंपरिक हल्दी यात्रा

हल्दी की पारंपरिक यात्रा बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज के आवास से शुरू होगी। यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास तक जाएगी। वहां बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से हल्दी अर्पित की जाएगी। इस आयोजन का केंद्र काशी विश्वनाथ मंदिर है। काशी की लोकपरंपरा में शिव विवाह से पूर्व सगुन की हल्दी चढ़ाने की विशेष मान्यता है। इस वर्ष विशेष हल्दी नासिक से मंगाई गई है।

सारंगनाथ से आएंगे ससुरालीजन

शिव विवाह की रस्म में बाबा के ‘ससुराल’ सारंगनाथ मंदिर से ससुरालीजन भी शामिल होंगे। वे हल्दी लेकर बांसफाटक पहुंचेंगे। इसके बाद शोभायात्रा निकलेगी। डमरू और शंखनाद के बीच हल्दी अर्पित की जाएगी। पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा। श्रद्धालु इस पल को देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

विशेष पूजन और भव्य श्रृंगार

हल्दी चढ़ाने से पहले 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष पूजन होगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का पारंपरिक श्रृंगार किया जाएगा। दूल्हे के रूप में सजे श्रीविश्वनाथ की झलक पाने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। इसके बाद नृत्यांजलि और स्वरांजलि की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। इस प्रकार, काशी में शिव विवाह की रस्मों के साथ महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारियां चरम पर पहुंच गई हैं। आस्था, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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