महामंडलेश्वर पद से दिया इस्तीफा; बोलीं– “जल्द उतार दूँगी भगवा वस्त्र”
नई दिल्ली। 90 के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री और हाल के वर्षों में आध्यात्मिक चर्चा का केंद्र बनीं ममता कुलकर् ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर ‘श्री यमाई ममता नंद गिरि’ ने 27 जनवरी 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
ग्लैमर से संन्यास और अब पद का परित्याग
ममता कुलकर्णी का जीवन हमेशा बदलावों से भरा रहा है। फिल्मों की चकाचौंध छोड़कर संन्यास का मार्ग अपनाने के बाद, अब महामंडलेश्वर पद से त्यागपत्र देना उनके जीवन के एक और बड़े वैचारिक मोड़ को दर्शाता है। इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, ममता ने अपने इस्तीफे को पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया निर्णय बताया है।
“सत्य को वस्त्रों की आवश्यकता नहीं”
अपने आधिकारिक त्यागपत्र में ममता कुलकर्णी ने साफ लिखा कि वह पूर्ण मानसिक संतुलन में यह फैसला ले रही हैं। उन्होंने प्रसिद्ध दार्शनिक जे. कृष्णमूर्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका ज्ञान अब किसी पद, वस्त्र या पहचान से बंधा नहीं रहेगा। पत्र में उन्होंने लिखा,“सत्य न तो किसी विशेष वस्त्र का मोहताज है और न ही किसी प्रतिमा का।”
गुरु के मार्ग पर चलने का दावा
ममता ने अपने गुरु श्री चैतन्य गगनगिरि नाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी कभी किसी औपचारिक पद को स्वीकार नहीं किया। इसी प्रेरणा से वह भी पद त्यागकर स्वतंत्र आध्यात्मिक यात्रा जारी रखेंगी।
भगवा वस्त्र पर बेबाक बयान
इस्तीफे से एक दिन पहले दिए इंटरव्यू में ममता कुलकर्णी ने भगवा वस्त्र को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि
भगवा पहनना किसी राजनीतिक पार्टी, खासकर BJP का एजेंट होना नहीं है, और वह जल्द ही भगवा वस्त्र भी उतार देंगी। उनके इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
किन्नर अखाड़ा से कोई विवाद नहीं
इस्तीफे के बावजूद ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़ा की प्रमुख डॉ. आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के प्रति गहरा सम्मान जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़े से उन्हें कोई शिकायत नहीं है और उन्हें वहां भरपूर प्रेम और सम्मान मिला है।
आगे क्या करेंगी ममता कुलकर्णी?
अपने भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए ममता ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से साधना में लीन हैं और इसे आगे भी जारी रखेंगी। उन्होंने बताया कि वह किसी अखाड़े, समूह या राजनीतिक विचारधारा से जुड़े बिना, स्वतंत्र रूप से आध्यात्मिक ज्ञान साझा करेंगी, उन लोगों के साथ जो समान सोच रखते हैं।
आध्यात्मिक सफर में नया अध्याय
ममता कुलकर्णी का यह फैसला उनके आध्यात्मिक जीवन में एक नया अध्याय माना जा रहा है। एक ओर जहां उन्होंने औपचारिक पद छोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर उनकी आध्यात्मिक यात्रा और भी व्यक्तिगत और स्वतंत्र होती नजर आ रही है।
