गाजियाबाद की घटना ने खोली डिजिटल दुनिया की खतरनाक सच्चाई, साइबर एक्सपर्ट ने बताए डरावने संकेत और बचाव के उपाय
गाजियाबाद की घटना ने झकझोरा समाज
गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसाइटी में सामने आई घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। मंगलवार देर रात तीन नाबालिग सगी बहनों ने नौवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में सामने आया कि बच्चियां कोरियन सीरीज, कोरियन गेम्स और डिजिटल स्टाइल की दुनिया में पूरी तरह डूबी हुई थीं। परिवार की आपत्ति और मानसिक दबाव के बीच यह दर्दनाक कदम उठा लिया गया।
मोबाइल की वर्चुअल दुनिया में उलझते बच्चे
इस मामले पर लोकल 18 ने साइबर एक्सपर्ट कामाक्षी शर्मा से बातचीत की। उन्होंने बताया कि आज के समय में बच्चों के लिए मोबाइल सिर्फ एक डिवाइस नहीं रहा। धीरे-धीरे वही उनका दोस्त बन जाता है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म बच्चों को ऐसी वर्चुअल दुनिया दिखाते हैं, जहां असली जीवन फीका लगने लगता है। इसके बाद बच्चे अनजान लोगों से बातचीत करने लगते हैं और मानसिक रूप से उनके प्रभाव में आ जाते हैं।
आदेश देने लगते हैं अनजान लोग
कामाक्षी शर्मा के मुताबिक, कई गेम और ऐप बच्चों को धीरे-धीरे कंट्रोल करने लगते हैं। पहले दोस्ती होती है। फिर टास्क दिए जाते हैं। क्या देखना है, क्या पहनना है और कैसे जीना है, यह तक तय किया जाने लगता है। साल 2018 में सामने आया ब्लू व्हेल गेम इसका सबसे खतरनाक उदाहरण था। आज भी इसी तरह के कई डिजिटल जाल सक्रिय हैं।
माता-पिता की अनदेखी बनती है वजह
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि अधिकतर मामलों में माता-पिता अनजाने में गलती कर बैठते हैं। पढ़ाई के नाम पर बच्चों को अलग मोबाइल दे दिया जाता है। लेकिन उसकी निगरानी नहीं होती। दोनों माता-पिता के वर्किंग होने से बातचीत कम हो जाती है। नतीजतन बच्चा फोन को ही अपना सहारा मानने लगता है। आउटडोर एक्टिविटी खत्म हो जाती है और मानसिक अकेलापन बढ़ता जाता है।
डार्क वेब और साइबर जाल का खतरा
कामाक्षी शर्मा ने चेतावनी दी कि डार्क वेब, हैकर्स और साइबर अपराधी बच्चों और बुजुर्गों दोनों को निशाना बना रहे हैं। कहीं गेमिंग के नाम पर फंसाया जाता है। कहीं फोटो मॉर्फिंग और ब्लैकमेलिंग की जाती है। कई पीड़ित डर के कारण शिकायत तक नहीं करते।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
साइबर एक्सपर्ट ने माता-पिता से अपील की कि बच्चों के फोन में पैरेंटल कंट्रोल जरूर लगाएं। उनके व्यवहार में बदलाव पर नजर रखें। उनसे खुलकर बात करें। सरकार से भी मांग की गई है कि जागरूकता अभियान चलाए जाएं और मजबूत साइबर हेल्प सेल बनाई जाए। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि अगर समय रहते डिजिटल दुनिया पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसके नतीजे और भी भयावह हो सकते हैं।
