डिजिटल अरेस्ट पर सरकार का बड़ा वार: एक बटन दबाते ही स्कैमर्स की साजिश फेल

Government solution for digital arrest scam with kill switch
डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने के लिए किल स्विच और इमरजेंसी बटन की तैयारी

‘किल स्विच’ और इमरजेंसी बटन से डिजिटल ठगी पर लगेगी लगाम, पीड़ितों को मिलेगा राहत का रास्ता

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर कड़ा एक्शन

देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ती ठगी की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। इसी को देखते हुए गृह मंत्रालय ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। अब इस समिति ने ऐसा समाधान सुझाया है, जिसे डिजिटल ठगों के खिलाफ बड़ा हथियार माना जा रहा है। सरकार ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्प पर काम तेज कर दिया है, जिससे एक बटन दबाते ही स्कैमर्स की चाल पर ब्रेक लग जाएगा।

क्या है किल स्विच का फॉर्मूला

दरअसल, किल स्विच का मतलब एक ऐसा इमरजेंसी सिस्टम है, जो किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि की स्थिति में तुरंत सक्रिय हो सके। जैसे ही किसी व्यक्ति को यह महसूस हो कि वह डिजिटल फर्जीवाड़े या डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार हो सकता है, वह इस बटन को दबा सकेगा। इसके बाद उसके सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन तुरंत रोक दिए जाएंगे। इससे ठगों को खाते से पैसा निकालने का मौका ही नहीं मिलेगा और बैंक अस्थायी रूप से अकाउंट फ्रीज कर देगा।

पेमेंट ऐप्स में जोड़ा जाएगा इमरजेंसी बटन

समिति के मुताबिक, इस किल स्विच को UPI और बैंकिंग ऐप्स में इमरजेंसी बटन के रूप में जोड़ा जा सकता है। पिछले साल दिसंबर में इस सिस्टम को लेकर एक अंतर-विभागीय समिति बनाई गई थी। इस पर विचार किया जा रहा है कि जैसे ही यूजर पेमेंट ऐप में मौजूद इमरजेंसी बटन दबाए, वैसे ही सभी बैंकिंग ऑपरेशन्स कुछ समय के लिए बंद हो जाएं। इससे स्कैम के दौरान होने वाले बड़े नुकसान को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा।

नुकसान हुआ तो होगी भरपाई की कोशिश

सरकार सिर्फ ठगी रोकने तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। समिति यह भी जांच कर रही है कि डिजिटल अरेस्ट या ऑनलाइन धोखाधड़ी के बाद पीड़ितों का पैसा वापस दिलाने के क्या रास्ते हो सकते हैं। खासतौर पर इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि संदिग्ध लेन-देन की जल्दी पहचान हो सके और पैसा कई म्यूल अकाउंट्स में बंटने से पहले रोका जा सके। इससे रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

कैसे करते हैं ठग डिजिटल अरेस्ट

डिजिटल अरेस्ट घोटालों में ठग खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देते हैं। साथ ही लीक हुए निजी डेटा, फर्जी आईडी और गिरफ्तारी वारंट दिखाकर डर का माहौल बनाते हैं। इसी घबराहट में लोग जल्दबाजी में बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं।

सरकार की तैयारी से बढ़ेगी सुरक्षा

सरकार का मानना है कि किल स्विच जैसे कदम डिजिटल ठगी के मामलों में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। इससे न सिर्फ लोगों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्कैमर्स के लिए लोगों को फंसाना भी काफी मुश्किल हो जाएगा। आने वाले समय में यह सिस्टम आम यूजर्स के लिए बड़ी सुरक्षा कवच बन सकता है।

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