बच्चे के जन्म के बाद हार्मोनल बदलाव महिलाओं के शरीर को प्रभावित करते हैं, जिससे पीरियड्स में देरी होना आम बात मानी जाती है।
डिलीवरी के बाद पीरियड्स न आना कितना नॉर्मल है
बच्चे को जन्म देने के बाद महिला का शरीर कई बड़े बदलावों से गुजरता है। ऐसे में पीरियड्स का तुरंत वापस न आना पूरी तरह सामान्य माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, डिलीवरी के बाद 6 हफ्तों से लेकर 12 महीनों तक पीरियड्स न आना आम बात है। वहीं जो महिलाएं पूरी तरह से स्तनपान कराती हैं, उनमें यह समय 18 महीने तक भी बढ़ सकता है। दरअसल, शरीर को प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से उबरने में समय लगता है और हार्मोन धीरे-धीरे संतुलन में आते हैं।
पीरियड्स की वापसी को कौन-कौन से कारण प्रभावित करते हैं
डिलीवरी के बाद पीरियड्स कब आएंगे, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। सबसे अहम कारण ब्रेस्टफीडिंग है। स्तनपान कराने से शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ता है, जो ओव्यूलेशन को रोकता है। इसके अलावा नींद की कमी और लगातार तनाव भी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। साथ ही शरीर की रिकवरी प्रक्रिया हर महिला में अलग होती है, इसलिए पीरियड्स का समय भी अलग-अलग हो सकता है।
डिलीवरी के बाद पीरियड्स को नॉर्मल करने के आसान उपाय
डिलीवरी के बाद सही लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार जिसमें आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में हो, शरीर को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त चीजें जैसे अलसी और अखरोट सूजन कम करने में मदद करती हैं। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, टहलना और पोस्टनेटल योग ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाते हैं। वहीं तनाव कम रखना भी हार्मोन को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाता है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है
अगर डिलीवरी के 12 से 18 महीने बाद भी पीरियड्स न आएं या फिर पेट में तेज दर्द, असामान्य ब्लीडिंग, कमजोरी या चक्कर जैसी समस्याएं हों, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच से किसी भी गंभीर समस्या को रोका जा सकता है।
