चारबाग की ‘लेडी सिंघम’ चंदना सिन्हा को बड़ा सम्मान, 1500 बच्चों को तस्करी से बचाया

चारबाग रेलवे स्टेशन पर बच्चों को बचाने वाली RPF इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा
1500 बच्चों की रक्षक बनीं RPF इंस्पेक्टर चंदना

लखनऊ स्टेशन पर तैनात RPF इंस्पेक्टर को ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’; सम्मान लेकर लौटते ही फिर शुरू किया रेस्क्यू मिशन

RPF Child Rescue Hero
लखनऊ। रेलवे स्टेशन की भीड़ अक्सर सब कुछ छिपा लेती है। लेकिन कुछ आंखें हर खतरे को पहचान लेती हैं। ऐसी ही एक जांबाज अफसर हैं आरपीएफ इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा। वह लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर तैनात हैं। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में 1500 से अधिक बच्चों को बचाया है। इसलिए अब उन्हें भारत सरकार ने बड़ा सम्मान दिया है। उन्हें रेलवे का सर्वोच्च पुरस्कार ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ मिला है।

हालांकि, चंदना के लिए यह सिर्फ सम्मान नहीं है। बल्कि यह जिम्मेदारी भी है। क्योंकि उनका मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है।

पुरस्कार लेकर लौटीं, फिर भी काम नहीं रुका

खबर के अनुसार 9 जनवरी 2026 को दिल्ली में उन्हें यह सम्मान मिला। इसके बाद वह लखनऊ लौटीं। लेकिन उन्हें आराम का समय नहीं मिला। जैसे ही प्लेटफॉर्म पर अकेले बच्चे की सूचना मिली, वह तुरंत निकल पड़ीं। फिर उन्होंने अपनी टीम के साथ मौके पर कार्रवाई की। इसलिए लोग उन्हें “लेडी सिंघम” भी कहने लगे हैं।

इंटेलिजेंस नेटवर्क ने बनाया मजबूत सिस्टम

चंदना ने स्टेशन पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। इसमें कुली, वेंडर और स्थानीय लोग शामिल हैं। वहीं कई मुखबिर भी जुड़े हैं। जैसे ही संदिग्ध गतिविधि दिखती है, सूचना तुरंत पहुंच जाती है। इसी कारण समय रहते कार्रवाई हो जाती है। इसके अलावा उनकी टीम में अधिकतर महिला अधिकारी हैं। इसलिए डरे हुए बच्चे जल्दी भरोसा कर लेते हैं। साथ ही काउंसलिंग भी आसान हो जाती है।

‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ में रचा रिकॉर्ड

जून 2024 में चंदना को ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ की कमान मिली। इसके बाद उन्होंने मानव तस्करी के रूट चिन्हित किए। खासकर बिहार से पंजाब और हरियाणा वाले रास्ते। फिर इन रूटों पर निगरानी बढ़ाई गई। नतीजा साफ दिखा।
साल 2024 में 494 बच्चों को बचाया गया। इनमें 41 बाल श्रम के शिकार थे।
फिर साल 2025 में 1,032 बच्चों का रेस्क्यू हुआ।
अब तक कुल 1500+ बच्चे सुरक्षित किए जा चुके हैं। वहीं 152 बच्चों को चंदना ने खुद रेस्क्यू किया।

घर पहुंचाना सबसे बड़ा संघर्ष

बचाव के बाद असली काम शुरू होता है। क्योंकि कई बच्चे घर लौटना नहीं चाहते। खासकर लड़कियों के मामले में यह मुश्किल बढ़ जाती है। वहीं कुछ परिवार सामाजिक डर से केस नहीं करना चाहते। इसलिए टीम घंटों समझाती है। फिर उन्हें सुरक्षित भविष्य की तरफ मोड़ा जाता है।

प्रेरणा बनी ‘उड़ान’ सीरियल की कहानी

चंदना मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की हैं। उनकी उम्र 41 वर्ष बताई गई है। उन्होंने 2010 में आरपीएफ जॉइन की। उन्होंने बताया कि टीवी सीरियल ‘उड़ान’ से उन्हें वर्दी पहनने की प्रेरणा मिली थी। आज वही प्रेरणा हजारों बच्चों की जिंदगी बदल रही है।

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