सऊदी अरब ने भारत को दिया सबसे बड़ा तेल सप्लायर का ताज, रूस पीछे छूट गया

Saudi Arabia oil barrels supply to India
फरवरी में सऊदी अरब ने भारत को हर दिन 11.3 लाख बैरल क्रूड तेल सप्लाई किया, रूस पीछे रह गया।

हर दिन 11.3 लाख बैरल क्रूड सप्लाई, कीमत और ट्रांसपोर्ट में फायदा

फरवरी के पहले हिस्से में सऊदी अरब ने भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने में रूस को पीछे छोड़ दिया है। कीमतों में कटौती और कम ट्रांसपोर्ट लागत के चलते सऊदी अरब एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। वैश्विक शिप ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के पहले 10 दिनों में सऊदी अरब ने भारत को औसतन 11.3 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) क्रूड भेजा। वहीं रूस की सप्लाई 10.9 लाख बीपीडी रही। यह करीब एक साल बाद सऊदी अरब की सप्लाई 10 लाख बीपीडी के पार जाने का संकेत है।

जनवरी में तस्वीर बिल्कुल अलग थी

जनवरी में भारत ने रूस से 11.4 लाख बीपीडी तेल आयात किया था। इराक से 10.3 लाख बीपीडी और सऊदी अरब से केवल 7.74 लाख बीपीडी तेल आया था। लेकिन फरवरी की शुरुआत में ही स्थिति बदल गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील के बाद आया। अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया और रूस से तेल खरीद को हतोत्साहित करने वाले अतिरिक्त शुल्क को हटा दिया। इसके बाद भारत ने रूस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने का संकेत दिया।

भारत के तेल आयात और ऊर्जा सुरक्षा

भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड तेल खरीदार है। साथ ही भारत चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर भी है, जिसकी रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन टन प्रति वर्ष है। 2030 तक यह क्षमता 309 मिलियन टन से अधिक होने की उम्मीद है। सऊदी अरब की सप्लाई बढ़ने की वजह कम ट्रांसपोर्ट लागत भी है। अरामको ने प्रति बैरल 30 सेंट का प्रीमियम हटाकर अपने तेल की कीमत ओमान और दुबई ग्रेड के बराबर कर दी। पश्चिम एशिया से भारत तक तेल पहुंचने में केवल 3 दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका से 45 से 55 दिन का समय लगता है।

विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, जिससे जरूरत पड़ने पर वह तेजी से सप्लाई बढ़ा सकता है। यही कारण है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सप्लाई सोर्सेज में विविधता ला रहा है। फिलहाल रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत का झुकाव सऊदी अरब की ओर बढ़ता दिख रहा है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि आने वाले महीनों में भारत के तेल आयात मानचित्र में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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