भारत ने हाल ही में रूस से तेल खरीद को लेकर स्पष्ट किया कि इस पर किसी का दबाव नहीं चलेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे रणनीतिक स्वायत्तता का हिस्सा बताया।
अमेरिका का बयान और रूबियो की पुष्टि
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका ने भारत से ‘अतिरिक्त रूसी तेल’ खरीदने पर रोक की कोई बात नहीं कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत मौजूदा स्तर पर तेल खरीद जारी रखेगा। इस बयान से यह साफ हुआ कि रूस से तेल खरीद पर भारत स्वतंत्र है और उसकी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होगी।
भारत ने रूस से आयात पहले ही कम किया
2025 के मध्य में रूस से तेल का आयात लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो अब 12 लाख बैरल तक घट चुका है। यह कमी बाजार की मांग, कीमत और विविधीकरण की वजह से है, न कि किसी राजनीतिक दबाव के कारण।
ट्रेड डील और ऊर्जा नीति
अमेरिका और भारत के बीच हुई हालिया ट्रेड डील में ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि अमेरिका ने अतिरिक्त रूसी तेल खरीद रोकने की बात कही, लेकिन इसका अर्थ केवल मौजूदा खरीद को स्थिर रखना है। विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा नीति लागत, उपलब्धता और जोखिम पर आधारित करता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत का संतुलित रुख
भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद संतुलित रुख अपनाया है। न तो रूस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए, न ही यूक्रेन को सीधे सैन्य सहायता दी। भारत ने शांति वार्ता का समर्थन किया और दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखा।
निष्कर्ष
रुबियो के बयान और ट्रेड डील के बाद भी भारत की स्थिति स्पष्ट है। रूस से तेल खरीदना भारत का स्वायत्त निर्णय है। ‘अतिरिक्त’ खरीद रोकने का मतलब मौजूदा स्तर पर स्थिरता है, न कि पूर्ण प्रतिबंध। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर टिके हुए है।
