केरल चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता का संदेश
नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की कथित नाराजगी को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। गुरुवार को थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और सभी नेता एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं।
संसद भवन में हुई अहम बैठक
यह मुलाकात संसद भवन स्थित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई। बैठक के बाद थरूर ने इसे बहुत अच्छी, सार्थक और सकारात्मक बातचीत बताया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “सब कुछ ठीक है और हम सब एकसाथ आगे बढ़ रहे हैं।”
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से किया इनकार
थरूर ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उनके लिए कभी रहा ही नहीं। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर ने कहा कि वह पहले से सांसद हैं और उनके मतदाताओं ने उन पर भरोसा जताया है। संसद में उनके हितों की आवाज उठाना ही उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
केरल चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस नेतृत्व ने यह पहल ऐसे समय पर की है, जब केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। अप्रैल-मई में संभावित इन चुनावों को पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस 2016 से केरल में सत्ता से बाहर है और इस बार वापसी के लिए संगठनात्मक एकता पर जोर दिया जा रहा है।
चुनाव प्रचार को लेकर थरूर का रुख
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार करेंगे, तो थरूर ने कहा,
“मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैंने प्रचार न किया हो।”
एक्स पर साझा की तस्वीर
बैठक के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अपनी तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा कि कई विषयों पर गर्मजोशी और सार्थक चर्चा हुई। साथ ही दोनों नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत के लोगों की सेवा के लिए सभी एकसाथ हैं।
नाराजगी की वजह क्या थी
दरअसल, बीते कुछ समय से थरूर की नाराजगी की चर्चाएं तेज थीं। 23 जनवरी को वह केरल से जुड़ी एक अहम पार्टी बैठक में शामिल नहीं हुए थे। सूत्रों के अनुसार, वह इस बात से आहत थे कि कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद होने के बावजूद उनका नाम नहीं लिया। इसके अलावा राज्य स्तर पर उन्हें दरकिनार किए जाने की भावना भी सामने आई थी।
बयानों पर हुआ था विवाद
हाल के महीनों में थरूर के कुछ बयानों और लेखों को लेकर कांग्रेस के भीतर असहमति देखने को मिली थी। भारत-पाकिस्तान तनाव और पहलगाम हमले के बाद कूटनीतिक संपर्कों पर उनकी टिप्पणियां पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग मानी गईं। हालांकि, थरूर ने बार-बार स्पष्ट किया है कि विदेश नीति को लेकर पार्टी से उनका कोई मतभेद नहीं है।
एकजुटता का स्पष्ट संदेश
खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद थरूर का बयान कांग्रेस के भीतर एकजुटता का मजबूत संकेत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व भी यह संदेश देना चाहता है कि आने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस एकजुट होकर मैदान में उतरेगी।
