बाल काटते-काटते बना करोड़ों का ठेकेदार: सुमित वारुडे की प्रेरक कहानी

बुरहानपुर के सुमित वारुडे, जिन्होंने सैलून से शुरुआत कर कंस्ट्रक्शन कंपनी स्थापित की
सैलून से ठेकेदारी तक सुमित वारुडे का प्रेरक सफर

बाल काटते-काटते बना करोड़ों का ठेकेदार: सुमित वारुडे की प्रेरक कहानी

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के शिकारपुरा इलाके में रहने वाले सुमित गणेश वारुडे की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। उनके पिता गणेश वारुडे एक साधारण सैलून चलाते थे। बचपन से ही सुमित दुकान पर हाथ बंटाने लगे। यहीं से उन्होंने मेहनत, अनुशासन और ग्राहकों से अच्छा व्यवहार करना सीखा। दरअसल, ग्राहकों से मधुर संबंध बनाना ही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

पढ़ाई और हुनर दोनों पर दिया ध्यान

सुमित ने अपनी प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने सेवा सदन कॉलेज से बीए फाइनल तक पढ़ाई की। हालांकि, पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बैंड बजाने की कला भी सीखी। यानी वह केवल सैलून तक सीमित नहीं रहे। उनके भीतर हमेशा कुछ बड़ा करने की चाह थी।

30 लाख लगाकर शुरू किया Construction Business

साल 2011 में सुमित ने ठेकेदारी के क्षेत्र में कदम रखा। शुरुआत आसान नहीं थी। सबसे बड़ी चुनौती थी पूंजी की कमी। उन्होंने 10 लाख रुपये का बैंक लोन लिया। इसके अलावा बड़े भाई सत्यनारायण वाघ और किशोर सोनी से 20 लाख रुपये उधार लिए। कुल 30 लाख रुपये जुटाकर उन्होंने कंस्ट्रक्शन बिजनेस शुरू किया। शुरुआत में कई बार नुकसान हुआ। कई प्रोजेक्ट अटक गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे काम मिलने लगा और पहचान बनती गई।

आज लाखों की कमाई, कई लोगों को रोजगार

आज सुमित करीब 15 साल से ठेकेदारी कर रहे हैं। वह ‘सरगम एंटरप्राइजेज’ नाम से अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी चला रहे हैं। वर्तमान में वह सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। साथ ही 10 से 15 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। खास बात यह है कि वह अपने इलाके के युवाओं को प्राथमिकता देते हैं। सुमित का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल पैसा कमाना नहीं है। बल्कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देना चाहते हैं। आने वाले समय में वह बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

मजबूत इरादों से बदलती है तकदीर

सैलून की छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज एक सफल कंस्ट्रक्शन कंपनी तक पहुंच चुका है। वास्तव में, सुमित वारुडे की Success Story यही सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात कभी भी रास्ता नहीं रोक सकते। मेहनत, व्यवहार और निरंतर प्रयास ही असली पूंजी है।

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