आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड में मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार
हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामले के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। सबसे पहले, एसीबी ने पूर्व बैंक मैनेजर रिषभ को गिरफ्तार किया। उसके साथ अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति नाम की महिला आरोपी को भी हिरासत में लिया गया। सभी आरोपियों का मेडिकल देर रात पंचकूला के सेक्टर-6 अस्पताल में करवाया गया।
कैसे हुआ 590 करोड़ का फर्जीवाड़ा
दरअसल, यह घोटाला हरियाणा सरकार के 18 विभागों के खातों से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी खातों से 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। बताया जा रहा है कि आरोपी रिषभ पहले चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी ब्रांच में मैनेजर था। इंटरनल ऑडिट में गड़बड़ी सामने आने के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने अपने दोस्तों और जानकारों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाईं। फिर सरकारी राशि इन फर्जी खातों में ट्रांसफर की गई। यह पैसा एफडी के रूप में दिखाया गया। खास बात यह है कि इस घोटाले में प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के करीब 180 करोड़ रुपये भी शामिल थे।
सरकार और बैंक का दावा
घोटाला सामने आने के बाद बजट सत्र में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर सवाल उठाए। वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया कि सरकार ने 24 घंटे के भीतर करीब 556 करोड़ रुपये की राशि वापस हासिल कर ली। दूसरी ओर, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बयान जारी कर कहा कि हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज समेत 583 करोड़ रुपये वापस जमा करा दिए गए हैं। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला चंडीगढ़ शाखा के सीमित खातों तक ही सीमित है। अन्य ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
आगे क्या होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह बैंक कर्मचारी हो या निजी व्यक्ति। फिलहाल एसीबी जांच में जुटी है। घोटाले के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज की सूची से हटाने का निर्णय लिया है।
