घरेलू हिंसा और सम्मान के नाम पर अपराधों से निपटने के लिए मिनिस्टीरियल काउंसिल का गठन
हेलसिंकी स्वीडन में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर सरकार ने एक अहम और निर्णायक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने इस गंभीर सामाजिक समस्या से निपटने के लिए ‘क्विनोफ्रिड’ (महिलाओं की शांति) नामक एक नई मिनिस्टीरियल काउंसिल के गठन की घोषणा की है। इस परिषद की अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करेंगे।
सरकारी एजेंसियों के बीच मजबूत होगा तालमेल
स्टॉकहोम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम क्रिस्टर्सन ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ पुरुषों की हिंसा देश की सबसे भयावह सामाजिक चुनौतियों में से एक है। नई परिषद का उद्देश्य विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि हिंसा के मामलों को समय रहते रोका जा सके।
किन मामलों पर रहेगा विशेष फोकस
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह पहल कई संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित होगी। इसमें गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हिंसा, घरेलू हिंसा और तथाकथित सम्मान के नाम पर की जाने वाली हिंसा शामिल है। कई मामलों में महिलाओं को उनके ही परिवार के सदस्य निशाना बनाते हैं, जो इस समस्या को और जटिल बना देता है।
कानूनी सख्ती पहले ही लागू
सरकार पहले ही पैरोल नियमों को सख्त कर चुकी है। इसके साथ ही बार-बार अपराध करने वालों के जोखिम आकलन की प्रक्रिया को भी मजबूत किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से खतरनाक अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 के अंत में दो दिल दहला देने वाली घटनाओं के बाद यह मुद्दा फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया। स्टॉकहोम के दक्षिणी इलाके रॉनिंगे और उत्तरी स्वीडन के शहर बोडेन में महिलाओं की हिंसक मौतों ने पूरे देश को झकझोर दिया।
रॉनिंगे और बोडेन के मामले
रॉनिंगे में 26 दिसंबर की रात एक 25 वर्षीय महिला के लापता होने की सूचना मिली थी। बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया और अगले दिन महिला का शव बरामद हुआ। इसके बाद मामले को हत्या में बदल दिया गया।
वहीं, बोडेन में 25 दिसंबर 2025 को पुलिस को एक घर से कॉल मिली, जहां जांच में पुष्टि हुई कि एक महिला की अत्यधिक हिंसा के कारण मौत हुई।
न्याय मंत्री का सख्त संदेश
न्याय मंत्री गुन्नार स्ट्रोमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“स्वीडन में एक महिला होना जानलेवा नहीं होना चाहिए। खतरनाक लोगों को जेल में रखा जाना चाहिए ताकि महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस कर सकें।”
‘क्विनोफ्रिड’ का ऐतिहासिक महत्व
‘क्विनोफ्रिड’ शब्द की स्वीडिश कानूनी परंपरा में गहरी जड़ें हैं। इतिहासकार इसे 13वीं सदी के शांति कानूनों से जोड़ते हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं पर हमलों और अपहरण को रोकना था। सरकार अब उसी अवधारणा को आधुनिक रूप में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
नई पहल से क्या बदलेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परिषद प्रभावी ढंग से काम करती है, तो स्वीडन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ठोस सुधार देखने को मिल सकते हैं। सरकार का यह कदम महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकेत माना जा रहा है।
