भद्रक जिले की घटना ने झकझोरा, 35 हजार में रिश्तेदार को सौंप दी गई मासूम
ओडिशा के भद्रक जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गरीब परिवार ने आर्थिक तंगी के चलते अपनी नवजात बच्ची को बेच दिया। यह घटना भंडारीपोखरी थाना क्षेत्र के बयांबनापुर गांव की है। मामला सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
दरअसल, बच्ची की मां रंजीता नायक ने स्वीकार किया है कि 80 हजार रुपये का कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने और उनके पति सीपू दास ने बच्ची को 35 हजार रुपये में अपने एक रिश्तेदार को सौंप दिया। आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। इसी कारण यह कठोर फैसला लिया गया।
कैसे सामने आया मामला
सबसे पहले बच्ची की दादी सावित्री दास को इस पर संदेह हुआ। जब उन्होंने घर में बच्ची को नहीं देखा तो सवाल किए। जवाब संतोषजनक नहीं मिला। इसके बाद 13 जनवरी को उन्होंने भंडारीपोखरी थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
शिकायत मिलते ही पुलिस, चाइल्ड लाइन और बाल संरक्षण इकाइयों ने संयुक्त जांच शुरू की। अगले ही दिन 14 जनवरी को बच्ची को कटक के राजाबगीचा इलाके से रेस्क्यू कर लिया गया। बच्ची को रिश्तेदार के घर से बरामद किया गया।
बच्ची की हालत और इलाज
फिलहाल बच्ची को बाल कल्याण समिति की निगरानी में रखा गया है। समय से पहले जन्म और कम वजन के कारण उसे इलाज की जरूरत है। भद्रक जिला मुख्यालय अस्पताल में इलाज जारी है। मां को भी बच्ची के साथ रखा गया है।
कानूनी कार्रवाई जारी
पुलिस ने बच्ची के माता-पिता, नानी और बच्ची को खरीदने वाली महिला को गिरफ्तार किया। बाद में जांच में सहयोग की शर्त पर उन्हें छोड़ा गया। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गरीबी बनी सबसे बड़ी वजह
रंजीता नायक का कहना है कि परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब है। पति बेरोजगार हैं। कर्ज पर लिया गया पैसा लौटाना मुश्किल हो गया था। वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को सामाजिक विफलता बताया है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक गरीबी मासूम जिंदगियों की कीमत तय करती रहेगी।
