यूएन में अमेरिका की दूरी, जेलेंस्की के लिए बड़ा झटका

संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस-यूक्रेन प्रस्ताव पर मतदान का दृश्य
संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान सदस्य देश।

रूस-यूक्रेन जंग के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने

संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन के प्रस्ताव पर अमेरिका ने वोटिंग से दूरी बना ली।
यह फैसला यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
वहीं रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के लिए यह राहत की खबर हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र में क्या हुआ?

24 फरवरी 2026 को United Nations General Assembly में ‘Support for Lasting Peace in Ukraine’ प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव में यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया।
साथ ही रूस से तुरंत और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की गई। 193 सदस्य देशों में से 107 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। 12 देशों ने विरोध किया। जबकि 51 देशों ने खुद को अलग रखा।

अलग रहने वालों में अमेरिका, भारत, चीन, ब्राजील, यूएई और हंगरी शामिल रहे।
विरोध में रूस, बेलारूस, ईरान और उत्तर कोरिया थे।

अमेरिका का रुख क्यों अहम?

अब तक अमेरिका यूक्रेन का सबसे बड़ा समर्थक रहा है। हथियारों और आर्थिक मदद में अमेरिका आगे रहा।
लेकिन इस बार अमेरिका ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। यह फैसला राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल में आया।
जनवरी 2025 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेन नीति में बदलाव के संकेत दिए थे।
अमेरिकी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा कि प्रस्ताव के कुछ शब्द शांति वार्ता में बाधा बन सकते हैं।

जेलेंस्की को झटका, पुतिन को राहत

अमेरिका की दूरी से यूक्रेन की कूटनीतिक स्थिति कमजोर दिख रही है।
क्योंकि अब तक अमेरिका खुलकर यूक्रेन के साथ खड़ा रहा था। इस बदलाव से जेलेंस्की पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, पुतिन के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अमेरिका का तटस्थ रुख रूस की रणनीति को मजबूती दे सकता है।

भारत और इजरायल का अलग रुख

इस वोटिंग में एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया। इजरायल ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया।
जबकि भारत ने खुद को अलग रखा। भारत शुरू से तटस्थ नीति अपनाता रहा है।
भारत का मानना है कि युद्ध का समाधान बातचीत से होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार शांति की अपील कर चुके हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 से जारी है। अब चार साल बाद भी समाधान दूर नजर आ रहा है।
हालांकि अमेरिका के इस कदम ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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