हाथ-पैर नहीं, हौसले की उड़ान ऊंची: सहरसा के निगम आनंद का IAS बनने का सपना

UPSC aspirant Nigam Anand inspirational story
सहरसा के निगम आनंद, जो दिव्यांगता के बावजूद IAS बनने का सपना देख रहे हैं

जन्मजात दिव्यांगता को पीछे छोड़ रोज 10 पन्ने लिखकर UPSC की तैयारी कर रहे निगम आनंद बने लाखों युवाओं की प्रेरणा

जज़्बे ने बदली किस्मत की परिभाषा

कहते हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंज़िल दूर नहीं रहती। बिहार के सहरसा जिले के 25 वर्षीय निगम आनंद ने इसी सोच को अपनी जिंदगी का आधार बनाया है। जन्म से ही हाथ और पैर न होने के बावजूद उनके सपने किसी आम युवा से कम नहीं हैं। बल्कि उनका लक्ष्य देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास कर IAS अधिकारी बनना है। उनका आत्मविश्वास हर उस सोच को तोड़ता है, जो शारीरिक सीमाओं को सफलता की बाधा मानती है।

सहरसा के छोटे गांव से बड़ा सपना

निगम आनंद सहरसा जिले के पतरघट प्रखंड के विशनपुर गांव के रहने वाले हैं। वह तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। बचपन से ही पढ़ाई में उनकी गहरी रुचि रही है। परिवार ने कभी उनकी कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। बल्कि हर कदम पर उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। यही वजह है कि निगम ने कभी खुद को दूसरों से कम नहीं समझा।

पढ़ाई में हमेशा रहे अव्वल

निगम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई CBSE बोर्ड से की। दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास करने के बाद उन्होंने बारहवीं भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने मगध यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स विषय में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के प्रति उनका अनुशासन शुरू से ही मिसाल रहा है। हर दिन एक तय रूटीन के साथ पढ़ना और लिखना उनकी आदत बन चुकी है।

लिखावट देख लोग रह जाते हैं हैरान

हाथ और पैर न होने के बावजूद निगम आनंद की लिखावट बेहद साफ और सुंदर है। नियमित अभ्यास के चलते वह रोज करीब 10 पन्ने लिखते हैं। यही अभ्यास उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है। उनकी लिखावट देखकर लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं। यह साबित करता है कि सीमाएं शरीर में नहीं, सोच में होती हैं।

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

निगम कहते हैं कि उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि उनके पास हाथ-पैर नहीं हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। किताबों से उनका गहरा लगाव है। पढ़ना-लिखना उनके लिए सिर्फ तैयारी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने का जरिया है।

IAS बनकर देश सेवा का संकल्प

फिलहाल निगम आनंद बैंकिंग परीक्षाओं के साथ-साथ UPSC की भी तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वह कहते हैं कि एक दिन IAS अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करना उनका सपना है।

लाखों युवाओं के लिए मिसाल

निगम आनंद की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं। वह साबित करते हैं कि शारीरिक चुनौतियां सपनों को रोक नहीं सकतीं। असली ताकत हौसले में होती है और जब हौसला मजबूत हो, तो हर मंज़िल आसान लगने लगती है।

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