वाराणसी–अयोध्या के पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, 8 पवित्र नदियों से जलाभिषेक; मोतिहारी बना आस्था का केंद्र
बिहार की पावन धरती पर शनिवार को आस्था, भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत महासंगम देखने को मिल रहा है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित कैथवलिया के विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की दिव्य प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया है। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के इलाकों तक “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण शिवमय हो गया है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उपस्थित रहेंगे। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी दर्शन-पूजन में शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, कई मंत्री, सांसद और विधायक इस आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे।
सुबह 8:30 से 10 बजे तक वाराणसी और अयोध्या से आए विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की जा रही है। गंगा सहित आठ पवित्र नदियों के जल से जलाभिषेक किया जा रहा है, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया है। पूजन के बाद सहस्त्रलिंगम शिवलिंग की प्रतिष्ठा की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस विशेष आयोजन के लिए कंबोडिया और कोलकाता से मंगाए गए फूलों से मंदिर को सजाया गया है। गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी से सजे ट्रक पहले ही पहुंच चुके हैं। शिवलिंग पर अर्पण के लिए 18 फीट लंबी विशेष माला तैयार की गई है, जिसमें भांग, धतूरा और बेलपत्र भी शामिल हैं।
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी है। इसे स्थापित करने के लिए 750 टन क्षमता वाली विशाल क्रेनों का उपयोग किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर कड़े इंतजाम किए हैं। यह प्रतिष्ठा माघ कृष्ण चतुर्दशी को हो रही है, जिसे शिवरात्रि के समान पुण्यकारी माना जाता
