बम पहचानने वाले रोबोटिक डॉग, AI डेकोय विमान और CELL AI जैसे सिस्टम से थल, जल और वायु सेना हुई हाईटेक
भारत की सुरक्षा रणनीति तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित आधुनिक युद्ध प्रणाली की ओर बढ़ रही है। राजस्थान के रेगिस्तानों से लेकर कश्मीर की पहाड़ियों और समुद्री सीमाओं तक, भारतीय सेना अब डेटा और AI के सहारे निगरानी, निर्णय और कार्रवाई कर रही है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, AI अब केवल सहायक तकनीक नहीं बल्कि भविष्य के युद्ध का मुख्य आधार बन चुका है।
हाल ही में भारतीय सेना ने उत्तर और दक्षिण कश्मीर में सीमा सुरक्षा के लिए AI-पावर्ड सर्विलांस सिस्टम तैनात किए हैं। ये सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पाकिस्तान-चीन सीमा पर बदलावों पर नजर रखने में सक्षम हैं। इनकी तुलना अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट मेवन’ से की जा रही है, जिसने वीडियो एनालिसिस का समय 70% तक घटा दिया था।
राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में हुए सैन्य अभ्यासों में AI-सक्षम सेंसर, टारगेट एक्विजिशन सिस्टम और स्मार्ट सर्विलांस टूल्स का व्यापक उपयोग किया गया। जयपुर में हुई सेना की परेड में पहली बार रोबोटिक म्यूल और रोबोटिक डॉग (MULE) को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया, जो बम पहचानने, निगरानी और दुर्गम इलाकों में सामान ढोने में सक्षम हैं।
भारतीय वायु सेना ने CELL AI नामक अपने GPT जैसे सिस्टम का खुलासा किया है। यह सिस्टम उड़ान डेटा, मौसम, रडार सिग्नल और मेंटेनेंस रिकॉर्ड का विश्लेषण कर बताता है कि कौन सा विमान मिशन के लिए तैयार है और कहां तत्काल निर्णय जरूरी है। इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किया गया AI-आधारित X-Guard डेकोय सिस्टम दुश्मन के रडार को भ्रमित कर असली विमान की सुरक्षा करता है।
ड्रोन तकनीक में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटरों को ट्रेनिंग दी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI सैनिकों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उन्हें अधिक सक्षम बनाकर युद्ध की गति और सटीकता को नई ऊंचाई दे रहा है।
