बंगाल में SIR ने खोला ऐसा खेल, घूम जाएगा आपका भी दिमाग
मतदाता सत्यापन में सामने आई हैरान करने वाली हकीकत
पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची सत्यापन अभियान यानी SIR के दौरान ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने न केवल चुनाव आयोग बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी चौंका दिया है। जांच में पता चला है कि राज्य की कई विधानसभा सीटों पर सैकड़ों मतदाताओं ने एक ही व्यक्ति को अपना पिता या माता दर्ज कर रखा है। यह खुलासा लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट में पेश हुआ चौंकाने वाला आंकड़ा
चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी। आयोग के अनुसार, 2025 की मतदाता सूची में आसनसोल जिले की बाराबनी विधानसभा सीट में एक व्यक्ति को 389 मतदाताओं का पिता दर्ज किया गया है। वहीं, हावड़ा जिले की बाली विधानसभा सीट में एक अन्य व्यक्ति को 310 मतदाताओं का पिता बताया गया है।
100 से ज्यादा संतान वाले ‘माता-पिता’
चुनाव आयोग ने बताया कि यह सिर्फ दो मामले नहीं हैं। पूरे राज्य में सात ऐसे व्यक्ति सामने आए हैं, जिन्हें 100 से अधिक मतदाताओं का माता-पिता दिखाया गया है। इसके अलावा, 10 लोगों को 50 या उससे अधिक मतदाताओं का अभिभावक बताया गया है। वहीं, 14 लोगों के नाम 30 से अधिक मतदाताओं से जुड़े पाए गए हैं।
आंकड़े जो सिस्टम की कमजोरी दिखाते हैं
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 8,682 लोगों को 10 से अधिक मतदाताओं का माता-पिता दिखाया गया है। इसके अलावा, 2 लाख से ज्यादा लोगों को 6 से अधिक और 4.5 लाख से ज्यादा लोगों को 5 से अधिक मतदाताओं का माता-पिता दर्ज किया गया है। ये आंकड़े खुद में बेहद चौंकाने वाले हैं।
NFHS डेटा से नहीं खाता मेल
चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 2019-21) का हवाला देते हुए बताया कि भारत में औसत परिवार का आकार 4.4 है। यानी आमतौर पर एक परिवार में 2 से 3 बच्चे होते हैं। ऐसे में किसी एक व्यक्ति से 50 या 100 मतदाताओं का जुड़ा होना स्वाभाविक नहीं माना जा सकता।
‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तहत जांच
सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि इन मामलों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे सही जानकारी देने को कहा गया है, ताकि रिकॉर्ड को दुरुस्त किया जा सके।
एक शख्स के छह मां-बाप भी दर्ज
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में एक व्यक्ति के छह माता-पिता तक दर्ज हैं। इसके अलावा, उम्र के अंतर से जुड़ी कई विसंगतियां भी पाई गई हैं, जिनकी अब गहन जांच की जा रही है।
वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल
इन खुलासों के बाद बंगाल की मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है।
