जम्मू नगर निगम की अनोखी पहल, मंदिरों के फूलों से बनेगी जैविक खाद

Temple flowers being collected for compost Jammu initiative
जम्मू में मंदिरों के फूलों से बनाई जाएगी जैविक खाद

आस्था का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ, नालियों और नदियों में नहीं जाएंगे फूल

फूलों के निस्तारण की नई व्यवस्था शुरू

जम्मू में नगर निगम ने एक सराहनीय पहल की शुरुआत की है। अब मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को कचरे में नहीं फेंका जाएगा। बल्कि उनका सम्मानजनक निस्तारण किया जाएगा। इस योजना के तहत फूलों को इकट्ठा कर उनसे जैविक खाद बनाई जाएगी। इसके लिए विशेष ऑटो की व्यवस्था की गई है। ये ऑटो रोजाना सुबह शहर के प्रमुख मंदिरों से फूल और पूजा सामग्री एकत्रित करेंगे। साथ ही श्रद्धालुओं और मंदिर समितियों से अपील की गई है कि वे फूलों को सामान्य कचरे से अलग रखें।

प्रमुख मंदिरों से शुरू हुई पहल

नगर निगम ने इस योजना की शुरुआत बावे माता मंदिर और पंजबख्तर मंदिर से की है। खासतौर पर नवरात्रों के दौरान यह पहल शुरू की गई है। क्योंकि इस समय मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है। इसलिए फूलों की मात्रा भी ज्यादा निकलती है। आने वाले समय में शहर के अन्य मंदिरों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। इससे बड़े स्तर पर कचरा प्रबंधन में सुधार होगा।

प्रोसेसिंग यूनिट में बनेगी जैविक खाद

इकट्ठा किए गए फूलों को नरवाल स्थित प्रोसेसिंग यूनिट में भेजा जाएगा। यहां आधुनिक मशीनों के जरिए फूलों का निस्तारण किया जाएगा। सबसे पहले फूलों से प्लास्टिक और अन्य अवांछित सामग्री अलग की जाएगी। इसके बाद फूलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाएगा। फिर वैज्ञानिक प्रक्रिया से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी। भविष्य में फंड मिलने पर इन फूलों से धूप और अगरबत्ती बनाने की भी योजना है।

पर्यावरण और आस्था दोनों का संरक्षण

इस पहल से शहर की स्वच्छता में सुधार होगा। साथ ही नदियों और नालों में प्रदूषण कम होगा। नगर निगम का कहना है कि इस खाद का उपयोग शहर के पार्कों और उद्यानों में किया जाएगा। इससे एक ओर पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। वहीं दूसरी ओर लोगों की धार्मिक आस्था का भी सम्मान होगा। क्योंकि अब फूलों को कचरे में नहीं डाला जाएगा।

लोगों ने पहल को सराहा

स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि नवरात्रों में बड़ी संख्या में फूल चढ़ाए जाते हैं। ऐसे में उनका सही तरीके से निस्तारण जरूरी है। लोगों ने सुझाव दिया कि मंदिर समितियों को भी इस पहल में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फूलों से धूप और अगरबत्ती बनाने की दिशा में भी काम होना चाहिए।

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