सूरत डायमंड बोर्स में 4700 में से सिर्फ 250 ऑफिस चालू, वैश्विक मंदी का असर
सूरत डायमंड बोर्स की हालत चिंताजनक
सूरत में बना दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड ट्रेडिंग हब इन दिनों संकट का सामना कर रहा है। सूरत डायमंड बोर्स, जिसे 2023 में शुरू किया गया था, अब लगभग खाली पड़ा है। करीब 350 मिलियन डॉलर की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में 4700 दफ्तर बनाए गए थे। हालांकि, वर्तमान में इनमें से सिर्फ लगभग 250 ही चालू हैं। यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि हीरा उद्योग गहरी मंदी से गुजर रहा है। साथ ही व्यापारियों की गतिविधियां भी काफी कम हो गई हैं।
क्यों फीका पड़ा सूरत का हीरा बाजार
दरअसल, सूरत को दुनिया में हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां करीब 90 फीसदी हीरों की प्रोसेसिंग होती है। इसी वजह से इस बड़े ट्रेडिंग हब को विकसित किया गया था। ताकि व्यापारी एक ही जगह से वैश्विक कारोबार कर सकें। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। वैश्विक मांग में गिरावट आई है। इसके अलावा आर्थिक अनिश्चितता और लैब-ग्रोउन डायमंड्स की बढ़ती लोकप्रियता ने भी इस उद्योग को प्रभावित किया है। इसलिए कई व्यापारी अपने ऑफिस बंद कर चुके हैं। वहीं कुछ अपने दफ्तर बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
वैश्विक मंदी का असर और भविष्य की चुनौती
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल सूरत तक सीमित नहीं है। बल्कि पूरी वैश्विक डायमंड इंडस्ट्री इससे प्रभावित हो रही है। मांग में कमी और कीमतों में गिरावट ने व्यापार को धीमा कर दिया है। इसके चलते रोजगार पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बाजार धीरे-धीरे सुधर सकता है। लेकिन फिलहाल सूरत डायमंड बोर्स की खाली इमारतें इस बड़े आर्थिक संकट की गवाही दे रही हैं।
